राजनीति

और पौड़ी के सर से छिन गया ‘ताज’

भाजपा ने 10 में से साढ़े नौ साल पौड़ी के राजपूत को दी कुर्सी

कुमाऊंनी राजपूत को पहली बार मिला मौका

देहरादून। कुमाऊंनी राजपूत पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री नामित होते ही यह मिथक टूट गया कि सत्ता का ताज तो पौड़ी के सिर ही सजता रहा है। आलम यह है कि भाजपा ने 10 साल में से साढ़े नौ साल पौड़ी के राजपूत को ही सत्ता में रखा। यह भी एक पहलू है कि किसी कुमाऊंनी राजपूत को किसी निर्वाचित सरकार में पहली बार सत्ता की शीर्ष कुर्सी सौंपी गई है।

राज्य गठन के बाद अंतरिम सरकार की बात छोड़ दी जाए तो भाजपा कई मुख्यमंत्री बदले पर बार ताज पौड़ी जिले के सिर ही सजा। राज्य के दूसरे आम चुनाव में सत्ता भाजपा के हाथ आई। भाजपा ने पौड़ी निवासी बीसी खंडूड़ी को मुख्यमंत्री बनाया। खंडूड़ी को बदला गया तो पौड़ी के डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को सत्ता दे दी गई। डॉ. निशंक को फिर हटाया तो खंड़ूड़ी को सीएम बना दिया।

2012 के चुनाव में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई। 2017 के आम चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा 70 में से 57 सीटें जीतकर इतिहास बना दिया। तमाम सियासी दांव-पेंच के बाद सरकार का मुखिया पौड़ी निवासी त्रिवेंद्र सिंह रावत को बना दिया गया। भाजपा हाईकमान ने त्रिवेंद्र को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया। इसके बाद सरकार का मुखिया तीरथ सिंह रावत को बनाया गया। तीरथ भी पौड़ी के ही निवासी है। कुल मिलाकर भाजपा के साढ़े नौ साल के कार्य़काल में मुख्यमंत्री तो ताश के पत्तों की तरह फेंटे गए। लेकिन हर बार ताज पौड़ी के सर ही सजाया गया।

राज्य में पहले आम चुनाव के बाद पहली बार सत्ता का मुखिया एक कुमाऊंनी राजपूत पुष्कर सिंह धामी को बनाया गया है। धामी अभी युवा हैं और 2022 के चुनाव में कमाल दिखाकर आगे के लिए भी अपना रास्ता साफ कर सकते हैं।

पांच साल नेता प्रतिपक्ष भी पौड़ी से ही

2007 से 2012 तक सूबे की सत्ता पर भाजपा काबिज रही। अहम बात यह भी है कि दौरान सत्ता के मुखिया पौड़ी से थे। तो पांच साल तक नेता प्रतिपक्ष रहे डॉ. हरक सिंह रावत भी पौड़ी के ही निवासी हैं।

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