उत्तराखंड

पुरुषोत्तम मास में श्री यंत्र मंदिर कनखल में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

पुरुषोत्तम मास में श्री यंत्र मंदिर कनखल में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन,

अपने पति की सम्मान की रक्षा के लिए सती ने अपने प्राणों की दी आहुति-आचार्य नीरज जोशी

हरिद्वार।

श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री यंत्र मंदिर कनखल में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रहा है। कथा के तीसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा को विस्तार देते हुए कथा व्यास आचार्य नीरज जोशी ने कहा कि कलयुग में गीता गायत्री गंगा और श्रीमद् भागवत कथा ही मनुष्य को मोक्ष प्राप्त करवाती है।

उन्होंने कहा कि पतिव्रता स्त्री का धर्म सर्वश्रेष्ठ धर्म है पतिव्रता माता सती ने अपने पति के सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी थी जब राजा दक्ष के कनखल में हो रहे यज्ञ में भगवान शिव को नहीं बुलाया गया और सती जब वहां पहुंची तो उसने पति भगवान शिव का स्थान नहीं देखा और सती के पिता के द्वारा भगवान शिव के अपमान में जब शब्द बोले गए तो सती ने अपने पति के सम्मान की रक्षा के लिए यज्ञ कुंड में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी और पतिव्रता धर्म का पालन किया।

आज कथा के अवसर पर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजन के महामंडलेश्वर और भारत माता मंदिर के महंत ललितानंद गिरी महाराज, गरीब दासी संप्रदाय के प्रमुख महामंडलेश्वर रवि देव शास्त्री,महामंडलेश्वर डॉक्टर सुमनानंद महाराज, महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद महाराज विशेष रूप से उपस्थित थे सभी संतो ने पुरुषोत्तम मास में श्रीमद् भागवत कथा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

कथा का आयोजन मुख्य यजमान हेमचंद्र जोशी, प्रकाश चंद जोशी एवं रमेश चंद्र जोशी ने संयुक्त रूप से श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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