देहरादून में ‘ट्रैफिक सुनामी’ का खतरा: नागरिक सहभागिता मॉडल की मांग

जून 2025 तक 13.4 लाख पंजीकृत वाहनों और पिछले आठ वर्षों में देहरादून जिले में समर्पित यातायात पुलिस बल में 34% कमी के बीच देहरादून और उत्तराखंड के लिए नागरिक सहभागिता मॉडल का प्रस्ताव
संभावित “ट्रैफिक सुनामी” से निपटने हेतु मुख्यमंत्री धामी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप और उत्तराखंड पुलिस को संस्थागत सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की अपील
देहरादून।
देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ को एक विस्तृत पत्र लिखकर देहरादून में लगातार बिगड़ती यातायात स्थिति से निपटने के लिए एक सिटिजन ट्रैफिक वॉलंटियर फोर्स के गठन का आग्रह किया है।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी देहरादून तीव्र एवं अनियोजित शहरी विस्तार, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, तेजी से बढ़ते आवासीय एवं वाणिज्यिक क्षेत्र, अतिक्रमण, बार-बार होने वाली सड़क खुदाई, खराब ट्रैफिक सिग्नल, बढ़ते पर्यटन दबाव, वीआईपी आवागमन तथा धरना-प्रदर्शनों के कारण अभूतपूर्व यातायात दबाव का सामना कर रही है।
उन्होंने रेखांकित किया कि देहरादून में ट्रैफिक जाम अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन चुका है, जिसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया समय, पर्यावरणीय दबाव और आर्थिक उत्पादकता पर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि पर्यटन सीजन के दौरान सप्ताहांत में प्रमुख मार्गों पर लंबे जाम लग जाते हैं और कई चौराहे लंबे समय तक बिना समुचित प्रबंधन के बने रहते हैं, जिससे आम नागरिकों, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही अत्यंत कठिन हो जाती है। पर्यटन पर निर्भर राज्य जैसे उत्तराखंड में ऐसी स्थितियां शहर और राज्य की छवि को सीधे प्रभावित करती हैं।
पत्र में उन्होंने चिंताजनक आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। नवंबर 2025 में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बयानों पर आधारित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अनूप नौटियाल ने बताया कि देहरादून जिले में समर्पित यातायात पुलिस बल की संख्या वर्ष 2017 में 411 थी, जो घटकर वर्तमान में 269 रह गई है, अर्थात आठ वर्षों में 34 प्रतिशत की कमी। यह कमी उस समय हुई है जब वाहनों की संख्या में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है।
आरटीआई आवेदन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जून 2025 तक देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर के आरटीओ कार्यालयों में कुल 13,42,528 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 10,66,786 वाहन देहरादून में, 2,02,055 ऋषिकेश में और 73,687 विकासनगर में पंजीकृत हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के 13 जिलों में जून 2025 तक पंजीकृत कुल 37,48,105 वाहनों में से 13,42,528 अर्थात लगभग 36% वाहन अकेले देहरादून जिले में पंजीकृत हैं।
सामान्य गणना के अनुसार, वर्तमान में एक समर्पित यातायात पुलिस कर्मी पर देहरादून जिले में लगभग 5,000 वाहनों का दायित्व है। यद्यपि यातायात पुलिस को होमगार्ड, पीआरडी और स्थानीय थानों का सहयोग मिलता है, फिर भी समर्पित बल की कमी को उन्होंने एक गंभीर संरचनात्मक समस्या बताया, विशेषकर आगामी चारधाम यात्रा और ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन को देखते हुए।
अपने पत्र में अनूप नौटियाल ने “उत्तराखंड ट्रैफिक सारथी” नाम से एक नागरिक-केंद्रित समाधान का प्रस्ताव रखा है। इसके अंतर्गत इच्छुक नागरिकों का पंजीकरण, सत्यापन और यातायात प्रबंधन के मूलभूत प्रशिक्षण के बाद उन्हें अप्रैल, मई और जून जैसे उच्च यातायात महीनों में ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की देखरेख और नियंत्रण में तैनात किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक सारथी कानून प्रवर्तन का स्थान नहीं लेंगे, बल्कि पैदल यात्रियों को मार्गदर्शन, कतार प्रबंधन और व्यस्त चौराहों पर यातायात प्रवाह में सहयोग जैसे कार्यों के माध्यम से “फोर्स मल्टीप्लायर” की भूमिका निभाएंगे।
इस विषय पर अनूप नौटियाल ने कहा, “आंकड़े और जमीनी स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यातायात का दबाव तेजी से बढ़ रहा है, जबकि समर्पित यातायात पुलिस बल में उल्लेखनीय कमी आई है। देहरादून जिले में 13.4 लाख से अधिक पंजीकृत वाहन और केवल 269 समर्पित यातायात पुलिस कर्मियों के साथ व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव है।”
उन्होंने आगे कहा, “यदि नागरिक आधिकारिक निगरानी में अपना समय और ऊर्जा देने को तैयार हैं, तो प्रशासन को उस इच्छाशक्ति को संस्थागत ढांचे के माध्यम से सकारात्मक दिशा देनी चाहिए। मैं स्वयं अप्रैल, मई और जून 2026 में प्रत्येक माह एक पूरा दिन, प्रतिदिन आठ घंटे, पुलिस पर्यवेक्षण में स्वेच्छा से सेवा देने को तैयार हूं। जब नागरिक जिम्मेदारी से आगे आते हैं, तो शासन मजबूत होता है।”
अनूप नौटियाल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि देहरादून सहित पूरे राज्य में बढ़ते यातायात संकट की समीक्षा की जा सके। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि आगामी चारधाम यात्रा और बढ़ते पर्यटन प्रवाह को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस को पर्याप्त मैनपावर, आधारभूत संरचना और लॉजिस्टिक संसाधनों से तत्काल सशक्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त संसाधन, आधुनिक उपकरण और कर्मियों की उपलब्धता के पुलिस बल पर बढ़ता दबाव डालना न तो उचित है और न ही टिकाऊ। बढ़ते वाहनों, वीआईपी मूवमेंट और सार्वजनिक आयोजनों के बीच प्रभावी यातायात एवं कानून-व्यवस्था प्रबंधन की अपेक्षा करना, बिना संस्थागत सुदृढ़ीकरण के, फील्ड कर्मियों पर असंगत दबाव डालता है। यदि उत्तराखंड सुव्यवस्थित विकास और सुरक्षित गतिशीलता चाहता है, तो राज्य सरकार को पुलिस बल के तत्काल संस्थागत सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देनी होगी।
अनूप नौटियाल ने हाल ही में मुख्यमंत्री को एक और पत्र लिखकर उत्तराखंड ट्रैफिक मैनेजमेंट आयोग के गठन तथा ट्रैफिक प्रबंधन हेतु ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) प्रणाली लागू करने पर विचार करने का आग्रह भी किया था। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उन्हें अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।
पत्र के अंत में उन्होंने पुलिस महानिदेशक से आगामी उच्च यातायात अवधि के दौरान इस सहयोगात्मक मॉडल को पायलट आधार पर लागू करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। उनका मानना है कि सहभागी दृष्टिकोण से न केवल जनशक्ति की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यातायात अनुशासन के प्रति जन-स्वामित्व की भावना भी मजबूत होगी और सार्वजनिक असंतोष को सहभागिता में बदला जा सकेगा।