उत्तराखंड

मेरा बलमा छोटा सा,पर मैं बालिग ठहरी

मेरा बलमा छोटा सा,पर मैं बालिग ठहरी

विख्यात लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी का एक बहुत ही लोकप्रिय अवधि लोकगीत है ” सैंया मिले लरिकईयां मैं का करूं” जिसमें नायिका अपने बाल विवाह की व्यथा को ये कहते हुए स्वर देती है कि मुझे तो पति छोटा मिल गया मैं क्या करूं ? किंतु जनपद रुद्रप्रयाग में बिल्कुल ही इसका उल्टा मामला सामने आया जब 20 साल की एक बालिग युवती अपने घर से भागकर अपने 19 साल के नाबालिग प्रेमी के घर

शादी धमक गई और उस से की जिद पर अड़ गई।

चाईल्ड हेल्प लाईन 1098 को जानकारी मिली कि टिहरी गढ़वाल से एक लड़की जिसकी उम्र 20 साल है, अपने घर से भागकर अपने 19 वर्षीय प्रेमी के घर आ गई और शादी की ज़िद पर अड़ गई। जनपद रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के नेतृत्व में मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से बाल विवाह के विरुद्ध चलाए जा रहे प्रभावी अभियान के दृष्टिगत इस घटना से लड़के के घरवालों के होश फाख्ता हो गए और उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन की इसकी जानकारी दी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ अखिलेश कुमार मिश्र के निर्देश पर इनकी काउंसलिंग के लिए तत्काल एक संयुक्त टीम गठित की गई जिसमें वन स्टॉप सेंटर से केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट, बाल कल्याण समिति से ममता शैली, गीता मालासी एवं दलवीर सिंह रावत तथा चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला समन्वयक सुरेंद्र सिंह रावत द्वारा लड़की और लड़के की काउंसलिंग की गई। लड़की को समझाया गया कि उसका एक गलत कदम लड़के के भविष्य अंधेरे में डाल सकता है।

लड़के को भी समझाया गया कि जब तक वह 21 वर्ष का नहीं हो जाता है तब तक वह शादी के योग्य नहीं है तथा उसके और परिजनों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो सकती है।इसके बाद लड़की के परिजनों से दूरभाष पर बात की गई और कहा गया कि लड़की के घर वापस आने पर उस पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं किया जाएगा तथा लड़के के बालिग होते ही दोनों के परिजनों की आपसी सहमति से इनका विवाह किया जाएगा। इस प्रकार काउंसिलिंग करके इस मामले को सुलझाया गया तथा लड़की को सुरक्षित उसके घर रवाना किया गया।

पिछले वर्ष भी बसुकेदार तहसील में ऐसा ही एक मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्यवाही करते हुए शादी रुकवा दी गई थी जब एक नाबालिग लड़का अपनी बालिग प्रेमिका के घर पहुंच कार शादी की तैयारी में जुट गया था। हालांकि उस प्रकरण में बालिग लड़की के परिवार वालों की मौन सहमति थी।

समाजशास्त्री ऐसी बढ़ती घटनाओं के मूल में बच्चों पर परिवार का घटता असर, मां बाप द्वारा उनको समय ना देने और आवश्यकता से अधिक सोशल मीडिया पर बच्चों के समय बिताने को मान रहे हैं।

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