उत्तराखंड

चारधाम यात्रा : वायरल वीडियो से बीकेटीसी पर गंभीर सवाल

चारधाम यात्रा : वायरल वीडियो से बीकेटीसी पर गंभीर सवाल

कई अहम पदों के रिक्त होने से इंतजामात पर पड़ रहा प्रतिकूल असर

गैर सनातनी से धाम में प्रवेश से पहले एफिडेविट तो मांगा, पर नहीं जारी की कोई एसओपी

पूर्व विधायक मनोज रावत ने बीकेटीसी से मांगा स्पष्टीकरण

देहरादून। उत्तराखंड स्थित चार धाम यात्रा शुरू होने का देश-विदेश के श्रद्धालुओं को ही बेसब्री से इंतजार नहीं रहता है, अपितु होटल व ट्रैवल कारोबारियों से लेकर तमाम तरह के व्यवसायियों की आर्थिकी भी इस पर निर्भर रहती है। यात्रा शुरू होने से पहले कई स्तरों पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के संबंध में तमाम दावे किये जाते हैं। मगर इस वर्ष यात्रा के दौरान खास कर केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है वीडियोज ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

वायरल वीडियो और प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस-प्रशासन सोशल मीडिया में वीडियो शेयर करने वालों के विरुद्ध यात्रा का दुष्प्रचार, भ्रामक जानकारी फ़ैलाने आदि के आरोप में धड़ाधड़ मुकदमें दर्ज करने में लगी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि मुकदमें दर्ज करने के पीछे शासन-प्रशासन की मंशा भय पैदा करने की है, ताकि कोई व्यक्ति यात्रा की वास्तविकता को उजागर नहीं कर सके।

कमियों को सुधारने की मांग

यात्रा व्यवस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को कमियों को छिपाने के बजाय उन्हें दुरुस्त करने पर ध्यान देना चाहिए। केदारनाथ धाम की अव्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियों से स्थानीय तीर्थ-पुरोहित से लेकर कारोबारी तक नाराज हैं। उनकी चिंता है कि जिस प्रकार के वीडियो वायरल हो रहे हैं उससे चारधाम यात्रा के संबंध में देशभर के श्रद्धालुओं में यहां की गलत छवि जा रही है। इस कारण भविष्य में यात्रा पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

बीकेटीसी की प्रशासनिक स्थिति पर सवाल

सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि चार धामों में से दो प्रमुख धामों बदरीनाथ व केदारनाथ की व्यवस्था देखने वाली बीकेटीसी का प्रशासन भगवान भरोसे चल रहा है। प्रदेश सरकार ने यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) विजय थपलियाल को आरोपों के चलते पद से हटा दिया था। सूत्रों के मुताबिक नए सीईओ को लेकर शासन स्तर पर काफी कवायद की गई। मगर कोई भी अधिकारी वर्तमान अध्यक्ष के साथ काम करने को तैयार नहीं हुआ।

आनन-फानन में शासन ने रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी को सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। जिलाधिकारी के पास इतने काम होते हैं कि वो सीईओ की जिम्मेदारी को कितनी कुशलता से निभा पाएंगे, इस पर संशय बना हुआ है। वो भी उस स्थिति में जब बीकेटीसी में अपर मुख्य कार्याधिकारी, उप मुख्य कार्याधिकारी, अधिशासी अधिकारी (केदारनाथ), मंदिर अधिकारी जैसे प्रमुख पद रिक्त पड़े हुए हैं।

यही नहीं बदरीनाथ धाम में पूर्णकालिक धर्माधिकारी समेत वेदपाठियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वेदपाठियों के पद पर केदारनाथ धाम और बीकेटीसी द्वारा संचालित संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को संबद्ध किया गया है। इन पदों पर नियुक्ति के लिए बीकेटीसी द्वारा सेवा नियमावली के प्रावधानों के तहत विज्ञप्ति प्रकाशित कर आवेदन पत्र भी आमंत्रित किये गए थे। मगर एक वर्ष से अधिक का समय व्यतीत होने के बावजूद बीकेटीसी ने नियुक्ति प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाला हुआ है।

उप मुख्य कार्याधिकारी, अधिशासी अधिकारी (केदारनाथ) आदि जैसे पद विभागीय प्रोन्नति के पद हैं। इन पदों को भरने में भी बीकेटीसी कोई रूचि नहीं दिखा रही है। इसके कारण बीकेटीसी की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है और इसका सीधा असर धामों की यात्रा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बीकेटीसी द्वारा इस वर्ष यात्रा ड्यूटी में कार्मिकों की मनमाने तरीके से की गई ट्रांसफर पोस्टिंग के कारण भी कई तरह की व्यवहारिक दिक्क्तें पैदा हो रही हैं। .

आंतरिक गुटबाजी और निर्णयों में देरी

सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में बीकेटीसी में अंदरूनी गुटबाजी भी चरम पर पहुंच गई है। इस कारण कई मामलों में निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। विगत कुछ माह पूर्व बीकेटीसी ने रिक्त पड़े कुछ पदों के लिए प्रतिनियुक्ति व संविदा पर तैनाती के लिए समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित की थी। विज्ञप्ति के प्रकाशन के बाद कर्मचारी संगठन खुल कर इसके विरोध में आ गया था। उनकी मांग थी की पहले कार्मिकों की पदोन्नति की प्रक्रिया सम्पन्न की जाए।

तब बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती भी कर्मचारियों के पक्ष में उतर आये थे और उन्होंने प्रतिनियुक्ति व संविदा पर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए बाकायदा पत्र भी लिखा था। उसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

बीकेटीसी के पदाधिकारियों में आपसी सर-फुटोब्बल की चर्चाएं आम हैं। अभी विगत दिन बदरीनाथ धाम में कार्यालय खोलने को लेकर दो पदाधिकारियों के बीच हुई तनातनी के प्रकरण पर कर्मचारी व तीर्थ-पुरोहित खूब चटकारे ले रहे हैं।

पूर्व विधायक के आरोप और सवाल

उधर, केदारनाथ क्षेत्र के पूर्व विधायक मनोज रावत ने यात्रा व्यवस्थाओं के नाम पर बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को निशाने पर लिया है। अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मनोज ने आरोप लगाया कि बदरी-केदार की यात्रा को हर साल उलझाने की नई कोशिश हो रही है। पिछले दो सालों यात्रा का भट्टा सरकार ने रजिस्ट्रेशन आदि बेतुके निर्णयों से बैठाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि द्विवेदी के सनातनी ही प्रवेश करेंगे, बिना एफिडेविट के प्रवेश नहीं मिलेगा जैसे बयानों ने पहले ही चरण में यात्रा और यात्रियों को उलझा कर रख दिया है। यात्री परेशान हैं पूछ रहे हैं कि, क्या बिना एफिडेविट के प्रवेश मिलेगा या नहीं? ग्रुप का एक एफिडेविट बनेगा या हर यात्री का अलग अलग? ये एफिडेविट कहा बनेगा? मंदिर के पास भी वकील बैठे हैं या नहीं ?

पूर्व विधायक ने कहा कि बीकेटीसी अध्यक्ष केवल बयानबाजी तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि गैर सनातनियों के प्रवेश वाले मामले में क्या बीकेटीसी या सरकार ने कोई नोटिफिकेशन जारी किया है? बिना नोटिफिकेशन के केवल बयान की कोई मान्यता नहीं है। उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष से आग्रह किया कि बदरी केदार की यात्रा बरबाद न करें और सरकार को भी इस संबंध में जल्दी स्पष्टीकरण देना चाहिए।

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