खुलासा

…तो जांच की आंच में झुलसेंगे दिहाड़ी कर्मी !

कुंभ कोरोना जांच फर्जीवाड़े से पल्ला झाड़ने का खेल शुरू

मैक्स ने हाईकोर्ट में कहा, नहीं की सैंपल की जांच

जांच को दो निजी प्रयोगशालाओं से किया समझौता

इस पूरे काम का सरकारी अफसरों ने किया पर्यवेक्षण

लैब भी कह सकती हैं कर्मियों के स्तर से फर्जीवाड़ा

पुलभट्टा जांच गड़बड़ी में दिहाड़ी कर्मी ही भेजे जेल

देहरादून। कुंभ काल में हरिद्वार में कोरोना जांच फर्जीवाड़े की जांच को भटकाने का खेल शुरू हो गया है। जांच का ठेका देने वाली कंपनी ने खुद को पाक-साफ बताते हुए हाईकोर्ट में दलील दी है कि उसने जांच की नहीं तो उसके खिलाफ एफआईआर क्यों। जांच का काम निजी लैब ने किया और सरकारी अफसरों ने उसका पर्यवेक्षण किया। अब सवाल यह है कि अगर निजी लैब भी कहें कि सैंपल और डॉटा फीड करने का काम कर्मियों ने किया है। ऐसे में क्या जांच के काम में लगाए गए दिहाड़ी कर्मियों पर गाज गिराकर ही इस मामले का पटाक्षेप कर दिया जाएगा।

कोराना जांच घोटाले की इस समय देशभर में चर्चा है। सरकार के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए एसआईटी भी बना दी गई है। अब जांच को भटकाने का खेल शुरू होता दिख रहा है। अफसरों बगैर जांच पड़ताल के ही मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज को काम सौंप दिया। एफआईआर में इस कंपनी को भी अभियुक्त बनाया गया। मैक्स ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल करके खुद को पाक-साफ बताते हुए कहा है कि कोरोना की जांच उसने नहीं की। बल्कि जांच के लिए दो निजी लैब नालवा लेबोरेटरीज और डॉ. लाल चंदानी से समझौता किया। अगर कोई फर्जी परीक्षण किया गया है तो इसमें मैक्स की कोई भूमिका नहीं है। वैसे भी नमूना संग्रह और अन्य डॉटा फीडिंग काम पर अफसर लगातार पर्यवेक्षण कर रहे थे। अब मामला निजी लैब के पाले में है। अगर ये दोनों लैब भी इसी तरह का तर्क दें और कहें कि अगर कोई फर्जीवाड़ा हुआ है तो फील्ड में काम कर रहे कर्मियों के स्तर से हो सकता है। इस आशंका को इस तथ्य के प्रकाश में देखें कि पिछले माह ऊधमसिंह नगर जिले के पुलभट्टा में भी कोरोना जांच में इसी तरह का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस मामले में मौके पर मिले दिहाड़ी कर्मियों को ही जेल भेजा गया है। न तो कंपनी से पूछताछ हुई और न ही स्वास्थ्य महकमे से। यहां बता दें कि सैंपल लेने और जांच के लिए कंपनियों ने स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को नौकरी पर रखा था। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश इस काम में निपुण नहीं थे। जो बताया गया वहीं ये लोग करते रहे।

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