Home खुलासा राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिलवाया 178 प्रतिशत भुगतान

राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिलवाया 178 प्रतिशत भुगतान

2.19 लाख का क्लेम किया था निरस्त

उपभोक्ता को मिला 3.91 लाख का भुगतान 

काशीपुर। उपभोक्ता आयोग ने परिवादी को उसके क्लेम का पौने दो गुने से अधिक 178 प्रतिशत भुतान कराया है। उधमसिंह नगर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेन्द्र पाल सिंह के आदेश पर बीमा कंपनी द्वारा जमा कराया गया पूरी राशि का चेक परिवादी विनोद कुमार भल्ला को दिया गया।

काशीपुर के विनोद कुमार भल्ला की ओर से अधिवक्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने जिला उपभोक्ता फोरम परिवाद दायर करके कहा गया था कि परिवादी ने न्यू इंडिया एश्योरेंस से एक मेडी क्लेम करायी। इसके अन्तर्गत परिवादी की बीमित राशि ढाई लाख तथा उसकी पत्नि व पुत्र की डेढ़-डेढ़ लाख रूपये थी। परिवादी को बीमा अवधि में ह्रदय रोग होने पर उसने काशीपुर व बरेली के अस्पतालों में इलाज कराया जिस पर 2,19,619 का खर्च हुआ जिसके भुगतान के लिये बीमा कम्पनी को क्लेम प्रस्तुत किया। कंपनी ने हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज के इलाज का क्लेम नहीं देने की बात की। इसके बाद परिवाद दायर किया गया।

बीमा कम्पनी की ओर से कहा गया है कि परिवादी की बीमारी का जब इतिहास जाना गया तब ज्ञात हुआ कि परिवादी को पूर्व से डायबिटीज तथा ह्रदय रोग था। हाई ब्लड प्रेशर तथा डायबिटीज की बीमारी का इलाज खर्च पालिसी की शर्तों के आधार पर नहीं मिल सकता है। इसलिये बीमा क्लेम को सही खारिज किया गया है।

जिला उपभोक्ता फोरम के तत्कालीन अध्यक्ष आरडीपालीवाल तथा सदस्या नरेश कुमारी छाबड़ा तथा सदस्य सबाहत हुसैन खान ने परिवादीं के अधिवक्ता नदीम उद्दीन के तर्कों से सहमत होते हुये अपने निर्णय में लिखा कि बीमा कम्पनी ने चिकित्सक का यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया है कि परिवादी की पूर्व बीमारी के कारण ही स्टेन्टिंग की गयी। परिवादी ने हाई ब्लड प्रेशर तथा डायबिटीज के इलाज का कोई क्लेम नहीं मांगा है।

जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कम्पनी को बीमा क्लेम की धनराशि दो लाख उन्नीस हजार छः सौ उन्नीस, 7 प्रतिशत वार्षिक की दी से साधारण ब्याज सहित जो परिवाद करने की तिथि 21-05-2013 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगा का भुगतान एक माह के अन्दर करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति के लिये रू. 10 हजार तथा वाद व्यय रू. 5 हजार का भी भुगतान करने का आदेश दिया है। 

बीमा कम्पनी ने इस आदेश के विरूद्ध राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जस्टिस डीएस त्रिपाठी तथा सदस्य उदय सिंह टोलिया की पीठ ने अपने निर्णय में पूर्व बीमारी का सम्बन्ध ह्रदय रोग के इलाज से न होना मानते हुये जिला आयोग/फोरम के आदेश को पूर्णतः सही माना। इसके बाद कंपनी ने पूरी राशि का चेक अधिवक्ता नदीम की मौजूदगी में परिवादी को दिया।

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