मंदिर हो या घर, मंज़ूर नहीं बालिका वधू या वर

मंदिर हो या घर, मंज़ूर नहीं बालिका वधू या वर
रुद्रप्रयाग में बाल विवाह अभियान के विरुद्ध प्रभावी अभियान ज़ारी
ऊखीमठ के भोलेश्वर महादेव मंदिर में फेरे लेने के पहले रुकवाया बाल विवाह
भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और बाणासुर की पुत्री ऊषा के पौराणिक विवाह की साक्षी नगरी ऊखीमठ आज बाल विवाह का पाप उठाते उठाते बच गई।
ऊखीमठ के भोलेश्वर महादेव मंदिर , (जहां के बारे में मान्यता है कि द्वारिकापुरी से अनिरुद्ध का अपहरण कर ऊषा ने यहीं पर उनको छुपा कर रखा था और जिनके साथ बाद में ऊखीमठ के श्री ओंकारेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित ऊषा मठ जिसे अब ऊखीमठ कहा जाता है में उनसे विवाह किया) में आज एक बालिका का बालिका वधू बनने से बचा लिया गया बाल विकास परियोजना अधिकारी, ऊखीमठ देवेश्वरी कुंवर को सूचना मिली कि ऊखीमठ के नजदीक भोलेश्वर मंदिर में किसी नाबालिग़ का विवाह किया जा रहा है। उनके द्वारा तुरंत अपने कार्यालय से राजेंद्र सिंह नेगी एवं अनुज जोशी को मंदिर परिसर में इस बात की पुष्टि के लिए भेजा गया।

उनके द्वारा यह सूचना जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ अखिलेश मिश्र को दी गई जिनके निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर के केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट थाना ऊखीमठ को इस बावत सूचित किया गया। थाना प्रभारी मनोज नेगी द्वारा थाने से उप निरीक्षक पूजा और कांस्टेबल धीरेन्द्र द्वारा भी मंदिर परिसर में भेजा गया।
वहां जाकर पूरी टीम द्वारा परिजनों को समझाया गया कि बाल विवाह कानूनी अपराध है और यदि उनके द्वारा ये विवाह नहीं रोका गया तो दोनों पक्षों के परिवारवालों को 2 साल का सख्त कारावास और 1 लाख का अर्थदंड भरना होगा। साथ ही लड़का पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी सिद्ध होगा और उसे सजा दी जाएगी।
वर वधू के परिजनों द्वारा अपनी भूल की माफी मांगी गई और लिखित में दिया गया कि उनके द्वारा लड़की के बालिग होने के पश्चात हो विवाह किया जाएगा।