राजा जी टाइगर रिजर्व में कैसे बन गई अवैध मजारे, सोया रहा प्रशासन

उत्तराखंड
राजा जी टाइगर रिजर्व में कैसे बन गई अवैध मजारे, सोया रहा प्रशासन
गजब पर्यटकों को पैदल चलने की अनुमति नहीं बन रही है अवैध मजारे
हरिद्वार, जिस टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को जीप से उतरने की इजाजत न हो ,पैदल चलने की अनुमति न हो वहां अवैध मजारे बना दी गई और यहां खादिमों ने दुकानें तक लगा कर ठगी का धंधा शुरू कर दिया है।
ऐसी मजारे हरिद्वार फॉरेस्ट डिवीजन में भी देखी गई है , खास बात ये कि ये सभी संरचनाएं हरिद्वार जैसी सनातन तीर्थ नगरी के आसपास बनाई गई है।
उदासीन वन महकम्मा
यदि किसी विभाग ने उत्तराखंड में अपनी भूमि पर अवैध कब्जे होने दिए तो उसमें सबसे ऊपर नाम आता है वन विभाग का, सरकारी वन भूमि यहां तक कि रिजर्व फॉरेस्ट, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और टाइगर रिजर्व में भी अवैध मजारे बनती चली गई और घुसपैठियों ने जंगल की भूमि कब्जा ली।
पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड की धामी सरकार ने सरकारी भूमि से अवैध मजारें हटाने और अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया हुआ है।
इस अभियान के दौरान पहले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध मजारों के होने का सच सामने आया जिसके बाद धामी सरकार के बुलडोजरों ने उनकी सफाई की।
राज्य में ऐसी 596 अवैध मजारों को सरकार ने ध्वस्त किया जिनमें कोई मानवीय अवशेष नहीं मिले।
राजा जी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग में भी भूमि अतिक्रमण कर बनाई गई मजारे है जिन्हें अभी तक हटाया नहीं गया है।
खबर है कि यहां एक दो नहीं कई अवैध मजारे बनी हुई है जिन्हें हटाने के लिए राजा जी टाइगर रिजर्व प्रशासन खामोशी ओढ़े हुए है।
ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया से लगे टाइगर रिजर्व में जहां पैदल चलने की अनुमति तक पार्क प्रशासन नहीं देता वहां उक्त अवैध मजारों तक लोग अपने दोपहिया चार पहिए वाहनों तक बे खौफ आते जाते है।
जबकि ये क्षेत्र हरकी पौड़ी के बेहद करीब माना जाता है।
जबकि ये मामला में न सिर्फ उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है बल्कि डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित द्वारा भी राजा जी पार्क प्रशासन को अवगत कराया गया है।
पार्क प्रशासन का कहना है कि इस मामले में कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है। स्टे के बाद पार्क प्रशासन ने कोर्ट में क्या पक्ष रखा तो इसका कोई जवाब नहीं मिलता,इसका नतीजा ये हुआ कि यहां पहले एक अवैध संरचना थी वहां आसपास और भी कई अवैध मजारे बन गई है और बेशकीमती सरकारी वन भूमि पर कब्जे का दायरा बढ़ता जा रहा है।
हरिद्वार को सनातन नगरी माना जाता है और ये सनातन की,गंगा शिव की आस्था का केंद्र के रूप में विश्व विख्यात है। ऐसे में यहां गैर सनातनी कार्यों की पार्क प्रशासन द्वारा छूट दिए जाने से हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों में गुस्सा भी है।
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम का कहना है कि गैर हिंदू संरचनाओं का हरिद्वार में कोई स्थान नहीं होना चाहिए पार्क प्रशासन इसे नहीं हटाएगा तो मजबूरन हमें कदम उठाने होंगे।
प्राचीन अवधूत आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने भी हरिद्वार क्षेत्र से ऐसे अवैध निर्माण हटाए जाने की मांग पर अपनी सहमति जताई है।