उत्तराखंड

‘कलम का गांधी’ बनी उत्तराखंड के जन-आंदोलनों और पत्रकारिता का जीवंत दस्तावेज़

कलम का गांधी’ उत्तराखंड के जन-संघर्षों व निर्भीक पत्रकारिता का जीवंत दस्तावेज़ : साहित्यकार

देहरादून, 14 सितंबर !
हिंदी दिवस के अवसर पर सुभाष रोड स्थित होटल व्हाइट हाउस में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक शीशपाल गुसाईं की पुस्तक ‘कलम का गांधी : कुंवर प्रसून और जन-सरोकार’ पर एक गहन परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध साहित्यकारों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पुस्तक को उत्तराखंड के जन-आंदोलनों और खोजी पत्रकारिता के इतिहास का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ करार दिया।

परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि कुंवर प्रसून केवल एक चिपको कार्यकर्ता तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सैकड़ों मील पैदल चलकर ज़मीनी हक़ीक़त सामने लाने वाले दिग्गज पत्रकार थे। 1970 से 1990 के दशकों में रविवार, दिनमान, नवभारत टाइम्स, युगवाणी और पर्वतजन जैसी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनकी रिपोर्टिंग ने पर्यावरण, जौनसार-पुरोला के सामाजिक सवालों और आमजन की पीड़ा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि लेखक शीशपाल गुसाईं ने 54 विस्तृत अध्यायों में कुंवर प्रसून के संपूर्ण जीवनवृत्त, उनकी निर्भीक लेखन शैली और सामाजिक सरोकारों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। पुस्तक में अस्कोट-आराकोट पदयात्रा, लखनऊ-दून मार्च (1978), कुंजाणी के ढंडक, कटाल्डी खनन, टिहरी बाँध विरोध, शराबबंदी, बीज बचाओ आंदोलन और दलितों के यहाँ भागवत कथा जैसे सामाजिक परिवर्तनों का तथ्यपरक चित्रण मिलता है। इसके अलावा सुंदरलाल बहुगुणा, धूम सिंह नेगी, शेखर पाठक, विजय जड़धारी, प्रताप शिखर, घनश्याम सैलानी, भारत डोगरा और नवीन नौटियाल जैसी महान हस्तियों के साथ उनके वैचारिक-मैदानी संबंधों तथा देश को झकझोरने वाली उनकी ऐतिहासिक रिपोर्टिंग का भी विस्तृत उल्लेख है।

साहित्यकारों ने इस कृति को शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे प्रदेश के विद्यालयों, महाविद्यालयों और पुस्तकालयों तक पहुँचाने पर बल दिया।

लेखक शीशपाल गुसाईं ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि हिंदी को व्यावहारिक जीवन में उतारने के साथ ही पहाड़ के जन-आंदोलनों व जन-नायकों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना इस पुस्तक का मूल ध्येय है। उन्होंने बताया कि पाठकों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए पुस्तक का दूसरा संस्करण शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

परिचर्चा में दिनेश शास्त्री, शूरवीर रावत, प्रेम साहिल , सत्यानंद बडोनी, चंद्र दत्त सुयाल,
चंदन सिंह नेगी , हर्ष मणि भट्ट , डिस्टिक कोऑपरेटिव बैंक टिहरी गढ़वाल के पूर्व अध्यक्ष गोपाल चमोली, सुरेश जुयाल सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार व बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

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