2027 की राह: भाजपा का चेहरा फिर होंगे पुष्कर सिंह धामी!
2027 की राह: भाजपा का चेहरा फिर होंगे पुष्कर सिंह धामी!
पीएम मोदी, अमित शाह और नितिन नबीन ने अपने दौरों में धामी की नीतियों को जमकर सराहा
अतुल बरतरिया
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के लगातार उत्तराखंड दौरे तथा उनके सार्वजनिक वक्तव्यों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दिया है। इन नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों और महत्वपूर्ण निर्णयों की खुलकर सराहना की है।
विशेष रूप से समान नागरिक संहिता (यूसीसी), धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून तथा जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) जैसे मुद्दों पर धामी सरकार की पहल को भाजपा नेतृत्व ने उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बताया है। यह महज औपचारिक प्रशंसा नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे संगठन और नेतृत्व के विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने यूसीसी को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। भाजपा लंबे समय से इसे अपने वैचारिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है। इसी तरह धर्मांतरण विरोधी कानून और नकल विरोधी कानून को भी भाजपा की वैचारिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में जब प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष तक इन निर्णयों की खुलकर सराहना करते हैं, तो इसका सीधा संदेश कार्यकर्ताओं और जनता तक पहुंचता है कि पार्टी राज्य सरकार के कामकाज से संतुष्ट है।
नितिन नबीन का हालिया तीन दिवसीय प्रवास भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठनात्मक बैठकों में सरकार और संगठन के समन्वय पर जोर दिया गया तथा धामी सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर चुकी है और सरकार के कार्यों को ही चुनावी आधार बनाने की योजना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आमतौर पर चुनाव से पहले अपने संभावित नेतृत्व को लेकर स्पष्ट संकेत देती है। जिस प्रकार पिछले कुछ समय में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने बार-बार धामी सरकार के निर्णयों और नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की है, उससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा पुष्कर सिंह धामी को ही अपने प्रमुख चेहरे के रूप में आगे रख सकती है।
धामी ने युवा नेतृत्व, आक्रामक निर्णय क्षमता और वैचारिक मुद्दों पर स्पष्ट रुख के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लगातार मिल रहा समर्थन उनके राजनीतिक कद को और मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
हालांकि अंतिम फैसले पर संसदीय समिति ही मुहर लगाएगी पर वर्तमान राजनीतिक संकेतों को देखें तो इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2027 की चुनावी तैयारी में पुष्कर सिंह धामी भाजपा के सबसे प्रमुख और स्वाभाविक चेहरे के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। उत्तराखंड की राजनीति में फिलहाल यही संदेश सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।