25 साल बाद भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी न बनाने पर फूटा आंदोलनकारियों का गुस्सा, 31 मई को देहरादून में जन जागरूकता पदयात्रा

25 वर्ष बाद भी स्थाई राजधानी न बनने पर गैरसैंण समिति की प्रेस वार्ता, 31 मई को जन जागरूकता पदयात्रा का ऐलान
देहरादून।
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी स्थायी राजधानी गैरसैंण न बनाए जाने के विरोध में आज उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून में _स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति_ द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक *विनोद प्रसाद रतूडी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान और जनता की भावनाओं के विपरीत लगातार सरकारें देहरादून को ही राजधानी के रूप में चलाकर गैरसैंण के साथ अन्याय कर रही हैं।
प्रमुख बिंदु:
1. 25 साल में भी स्थायी राजधानी नहीं: राज्य बनने के 25 वर्ष बाद भी गैरसैंण को पूर्ण कालिक राजधानी का दर्जा नहीं मिला। ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर जनता को भ्रमित किया गया।
2. देहरादून का हाल: देहरादून में भू-माफिया, खनन माफिया और क्राइम का बोलबाला है। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। राजधानी के नाम पर देहरादून को बर्बाद किया जा रहा है।
3. सरकारी जमीनों का बंदरबांट: जॉर्ज एवरेस्ट की ऐतिहासिक धरोहर वाली जमीन को मात्र 1 करोड़ रुपये की लीज पर निजी हाथों में सौंप दिया गया। यह उत्तराखंड की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है।
4. पहाड़ों की अनदेखी: पहाड़ के विकास, पलायन और बेरोजगारी पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। सरकारें केवल देहरादून केंद्रित विकास कर रही हैं।
आगामी कार्यक्रम:
समिति के राकेश ध्यानी ने बताया कि जनभावनाओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए 31 मई 2026, शुक्रवार को सुबह 8:00 बजे देहरादून के पर्यटक ग्राउंड से _जन जागरूकता पदयात्रा_ निकाली जाएगी। यह पदयात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जनता को स्थायी राजधानी गैरसैंण के मुद्दे से जोड़ेगी।
प्रेस वार्ता में वरुण चंडोला, आनंद राम, राजेंद्र प्रसाद कंडवाल, प्रकाश थपलियाल सहित दर्जनों राज्य आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। समिति ने सभी उत्तराखंड वासियों से अपील की है कि वे 31 मई की पदयात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मुहिम को मजबूत करें।