उत्तराखंड

गंगा दशहरा पर हर की पैड़ी में उमड़ा आस्था का सैलाब, पुण्य स्नान को पहुंचे लाखों श्रद्धालु

सुनील पांडे, हरिद्वार

हर की पैड़ी में गंगा दशहरे के दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का जन सैलाब,

एंकर-आज गंगा दशहरा के दिन हर की पैड़ी हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा। सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं का हर की पैड़ी पर आना शुरू हो गया था।आज गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य के 10 पाप नष्ट हो जाते हैं,ऐसी मान्यता है और पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरे की मान्यता और बढ़ जाती है और गंगा दशहरे में गंगा में आस्था की पवित्र पावन डुबकी लगाने से मिलने वाला फल कई गुना बढ़ जाता है।

इसलिए आज गंगा दशहरा के दिन हरिद्वार में श्रद्धालुओं की जबरदस्ती भीड़ देखने को मिल रही है। हरिद्वार के हर की पैड़ी के अलावा सुभाष घाट, कुशा घाट,चंडी घाट,कनखल में राजघाट,दक्षेश्वर महादेव मंदिर घाट, शीतला माता मंदिर घाट में श्रद्धालुओं का जमघट लगा हुआ है।

गंगा दशहरा का पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण के दिन मनाया जाता है मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से होती हुई भगवान विष्णु के चरणों को स्पर्श करते हुए भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी लोक पर ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन अवतरित हुई थी और इस पवित्र पावन दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है ।

जो सबसे पुण्य दिन माना जाता है।इस दिन गंगा नदी में स्नान और दान-पुण्य करने से साधक के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। निर्वाण पीठाधीश्वर और महानिर्वाणी पंचायती अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानन्द भारती महाराज का कहना है कि हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारी दस इंद्रियों यानी पांच कर्मेंद्रियां व पांच ज्ञानेन्द्रियां द्वारा किए गए पापों से गंगा दशहरे के दिन गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति के 10 प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और 28 तरह के नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है यह मनुष्य के शरीर द्वारा किए गए 3, वाणी द्वारा 4 और मन द्वारा 3 तरह की पाप नष्ट हो जाते हैं।

गंगा दशहरे की संख्या 10 संख्या का विशेष महत्व है।मां गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हुआ था।इस तिथि पर 10 विशिष्ट शुभ योगों का संयोग भी माना जाता है।यही कारण है कि इस दिन स्नान, ध्यान, उपवास, और दान सभी का 10 गुणा फल मिलता है।

राजा भगीरथ की तपस्या के कारण मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आई और जनकल्याण के साथ-साथ लोगों के मोक्ष का कारण बनी। धार्मिक ग्रंथों वेद-पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या करके मां गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। और जब गंगा दशहरा के दिन गंगा अवतरण हुआ तो पूरी सृष्टि का कल्याण हुआ।

गंगा दशहरे के दिन दान-पुण्य का फल 10 गुणा बढ़ जाता है।इस दिन जरूरतमंदों, ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, जल, घड़ा, और मौसमी फलों जैसे खरबूजा,आम आदि का दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।

इससे अक्षय फल यानी कभी समाप्त न होने वाला पुण्य प्राप्त होता है।गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदियों के किनारे, विशेष रूप से हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग, प्रयागराज और वाराणसी में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।इस दिन गंगा आरती में शामिल होने और “ॐ नमो गंगे विश्वरूपिण्यै” मंत्र का जाप करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है।

पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि गंगा भगवान विष्णु के चरणों को स्पर्श करते हुए पृथ्वी पर अवतरित होती है और पुरुषोत्तम मास भगवान श्री नारायण हरि का मास माना जाता है। इसीलिए पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने से मनुष्य को पुण्य लाभ कई गुणा मिलता है।

विभिन्न धर्म ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास में यदि पुरुषोत्तम मास पड़ रहा हो तो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन ही गंगा दशहरा मनाना अत्यंत शुभ और फलदाई होता है। गंगा दशहरा हेतु वृषभ राशि में सूर्य का होना आवश्यक है।15 जून को पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास सुबह 8:24 पर पूर्ण हो जायेगा, जबकि सूर्य देव दोपहर 12:53 पर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। अतः: मिथुनस्थ सूर्य में गंगा दशहरा शास्त्र सम्मत नहीं है। इसीलिए गंगा दशहरा 25 मई को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाना शास्त्र सम्मत है। जबकि निर्जला एकादशी अधिक मास के समाप्त होने पर शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी 25 जून के दिन मनाई जाएगी और तभी उसका निर्जल व्रत रखा जाएगा और तभी दान पुण्य किया जाएगा।

बाइट- आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानन्द

 

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