उत्तराखंड

देहरादून के व्यापर जगत ने कानून-व्यवस्था पर जताई चिंता, त्वरित सुधार और बेहतर समन्वय की मांग

देहरादून

देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने “स्थानीय व्यवसाय और कानून-प्रवर्तन – देहरादून परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक राउंडटेबल चर्चा में भाग लिया। यह संवाद शहर में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कमियों और उनके व्यवसायिक माहौल व सामाजिक ताने-बाने पर पड़ने वाले प्रभावों पर गंभीर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

इस बैठक का संयुक्त आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और शहर के रेस्टोरेंट व्यवसायी आनंद कांती द्वारा किया गया। इसमें हॉस्पिटैलिटी , होटल, शिक्षा, परिवहन, उद्योग, रिटेल सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिन्होंने शहर में क़ानूनी एनफोर्समेंट और प्रशासनिक जवाबदेही में गिरावट को लेकर अपनी साझा चिंता व्यक्त की।

चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने एनफोर्समेंट तंत्र के कमजोर पड़ने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित गतिविधियां, नियमों का असंगत पालन और जवाबदेही की कमी ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास भी कम हो रहा है।

एक प्रमुख मुद्दा हितधारकों और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी का रहा। प्रतिभागियों ने बताया कि व्यवसायों और नागरिकों द्वारा उठाए गए वास्तविक मुद्दे अक्सर अनसुने रह जाते हैं, जिससे निराशा और शासन व्यवस्था पर भरोसा कम होता है। सभी ने पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की।

हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों ने विशेष रूप से अपने संचालन से संबंधित नियमों में अस्पष्टता की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने पूर्ण अनुपालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अस्पष्ट और असंगत नीतियां भ्रम और अनजाने में उल्लंघन की स्थिति पैदा करती हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट और समान नियम बनाने की मांग की ताकि सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके।

चर्चा में बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उसके नकारात्मक प्रभावों पर भी विचार हुआ। प्रतिभागियों ने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा कभी-कभी व्यवसायों को मानकों और नियमों से समझौता करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे पूरे व्यवसायिक तंत्र की साख प्रभावित होती है। उन्होंने सख्त कानून-प्रवर्तन के साथ-साथ नैतिक व्यापार और स्व-नियमन की आवश्यकता पर बल दिया।

तेजी से बढ़ते क्षेत्रों, विशेष रूप से पर्यटन और नाइटलाइफ व्यवसायों के बेहतर प्लानिंग और रेगुलेशन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि विकास को बुनियादी ढांचे और स्थिरता के अनुरूप होना चाहिए, न कि अनियंत्रित रूप से बढ़ना चाहिए। कुछ गतिविधियों पर सीमा निर्धारित करने का सुझाव भी दिया गया।

प्रणालीगत सुधारों के अलावा, बेहतर समन्वय और अनुपालन के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए। इनमें सर्विंग टाइम नियमों में स्पष्टता लाना शामिल था, जैसे कि अंतिम ऑर्डर के बाद उचित समय देना ताकि संचालन सुचारू रूप से हो सके। साथ ही, पुलिस थाना स्तर पर बार और रेस्टोरेंट संचालकों के साथ आधिकारिक व्हाट्सएप समूह बनाने का सुझाव दिया गया, जिससे त्वरित संवाद और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

लाइसेंसिंग सुधारों पर भी जोर दिया गया, जिसमें गोवा जैसे राज्यों की तर्ज पर स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने का सुझाव शामिल था। प्रतिभागियों का मानना था कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और नियमों के उल्लंघन में कमी आएगी। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को केवल नाइटलाइफ से जोड़ने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

प्रतिभागियों ने चंडीगढ़ जैसे शहरों का उदाहरण भी दिया, जहां सख्त कानून-प्रवर्तन और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के चलते बेहतर अनुपालन संभव हो पाया है, भले ही संचालन समय अधिक हो। उन्होंने कहा कि एनफोर्समेंट और सामाजिक व्यवहार में सुधार साथ-साथ होना चाहिए।

चर्चा में युवाओं के बीच बढ़ते आक्रोश, आक्रामकता और नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई गई, विशेष रूप से स्कूल और कॉलेज स्तर पर। प्रतिभागियों ने जागरूकता अभियानों, सख्त निगरानी और शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों तथा एनफोर्समेंट एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

स्कूल स्तर पर अनुशासन मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए गए, जिनमें नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर सख्ती, हेलमेट अनिवार्यता और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करना शामिल था। इसके अलावा, पीजी और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की निगरानी और सत्यापन को अनिवार्य बनाने, रिकॉर्ड रखने और नियमित निरीक्षण की भी सिफारिश की गई।

चर्चा का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि इस संवाद को आगे बढ़ाते हुए नागरिकों, संस्थानों और नीति-निर्माताओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। प्रतिभागियों ने दोहराया कि कानून-व्यवस्था में सुधार एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए प्रशासन, एजेंसियों और समाज के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है।

बैठक में आयोजक के रूप में अनूप नौटियाल और आनंद कांती के साथ अनूपमा जोशी, एला गर्ग, कुनाल शमशेर मल्ला, रणधीर अरोड़ा, नवनीत ओबेरॉय, रसिक भाटिया, अविनाश तिवारी, माधव डालवी और हेमंत कूरिच की सक्रिय भागीदारी रही। सभी ने मिलकर देहरादून में विश्वास बहाली, सुशासन को मजबूत करने और सुरक्षित एवं सतत भविष्य सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

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