पीआईबी देहरादून के सौजन्य से उड़ीसा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा

पीआईबी देहरादून के सौजन्य से उड़ीसा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा
उत्तराखंड के पत्रकारों के दल के साथ चार दिन बिताए उड़ीसा में
अतुल बरतरिया
हाल ही में मुझे पत्रकार साथियों के साथ उड़ीसा (ओडिशा) के कुछ प्रमुख और अद्भुत स्थलों का भ्रमण करने का अवसर मिला। यह यात्रा मेरे लिए केवल घूमने का अनुभव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और आस्था को करीब से महसूस करने का एक अनमोल अवसर थी।

यात्रा की शुरुआत कोणार्क सूर्य मंदिर से हुई। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और शिल्पकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। जैसे ही मैंने इस विशाल रथ के आकार के मंदिर को देखा, मैं उसकी भव्यता में खो गया। पत्थरों पर उकेरी गई नक्काशी और 12 जोड़ी पहियों का अद्भुत निर्माण प्राचीन भारत की वैज्ञानिक और कलात्मक प्रतिभा का प्रतीक है। सूरज की किरणों के साथ यह मंदिर और भी अधिक दिव्य प्रतीत होता है।


इसके बाद मैं पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचा, जो हिंदुओं के चार धामों में से एक है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण महसूस हुआ। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर मन को असीम शांति मिली। यहाँ की महाप्रसाद परंपरा और भक्तों की आस्था ने मुझे गहराई से प्रभावित किया।
अंत में मैंने ओडिशा लोक भवन का भ्रमण किया, जो आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भवन पारंपरिक और आधुनिक वास्तुकला का सुंदर मिश्रण है। यहाँ जाकर ओडिशा के प्रशासनिक ढाँचे और विकास की झलक देखने को मिली।
इस यात्रा ने मुझे यह एहसास कराया कि उड़ीसा केवल धार्मिक स्थलों का केंद्र ही नहीं, बल्कि यह कला, इतिहास और आधुनिकता का संगम भी है। यहाँ की संस्कृति, लोगों की सरलता और स्थानों की भव्यता मेरे मन में हमेशा के लिए बस गई है।
अंततः, यह यात्रा मेरे जीवन की यादगार यात्राओं में से एक बन गई। आभार पीआइबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंदरियाल (IIS) जिन्होंने मुझे भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व करने का एक और अवसर दिया।