उत्तराखंड

जिपं में तबादले के बाद भी ‘कुर्सी’ पर जमे इंजीनियर, व्यवस्था पर सवाल

जिपं में तबादले के बाद भी ‘कुर्सी’ पर जमे इंजीनियर, व्यवस्था पर सवाल

जिपं ऊधम सिंह नगर में 26 साल से कार्यवाहक पदोन्नति कर रहे हैं काम

ऊधमसिंह नगर। जिला पंचायत एक बार फिर विवादों के घेरे में है। उठते सवालों के बीच अब प्रभारी अभियंता मोहन सिंह बिष्ट का मामला सुर्खियों में है।
जानकारी के अनुसार बिष्ट को करीब 23 वर्षों से जिला पंचायत में विभिन्न पदों पर तैनाती मिलती रही है।

ड्राफ्टमैन से लेकर कनिष्ठ अभियंता और फिर प्रभारी अभियंता तक। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत में पहले से अभियंता जफर अंसारी की मौजूदगी के बावजूद एक अलग पद “प्रभारी अभियंता” का सृजन कर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी गई थी, जिस पर तब से ही व्यवस्थागत पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं। हाल ही में पंचायती राज विभाग की निदेशक निधि यादव द्वारा उनका तबादला बागेश्वर किए जाने के आदेश जारी हुए थे।

आदेश को लगभग 10-12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आरोप है कि बिष्ट अब तक कार्यमुक्त नहीं हुए हैं और उसी पद पर कार्यरत बने हुए हैं। इस स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली और तबादला व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इतने लंबे समय से एक ही स्थान पर बने रहने के कारण प्रशासनिक ढांचे में एक प्रकार की “जड़ता” आ गई है। वहीं कुछ सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि इस लंबे कार्यकाल के दौरान उनकी संपत्ति और प्रभाव में भी वृद्धि देखी गई है,

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब स्थानांतरण आदेश जारी हो चुके हैं, तो फिर अमल क्यों नहीं हो पा रहा है। और क्या जिला पंचायत की कार्यप्रणाली वास्तव में किसी “व्यवस्था” के तहत चल रही है या फिर व्यक्तिगत प्रभाव के चलते ? मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सख्ती की परीक्षा बन चुका है।

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