Uncategorized

अगर सड़कें सुनसान हो जाएं. तो संसद आवारा हो जाएगी

दिल्ली जंतर मंतर पर छात्रों की निर्मम पिटाई और राहुल के धरने पर वरिष्ठ पत्रकार अवनीश प्रेमी का आलेख

यह प्रसिद्ध कथन महान समाजवादी विचारक और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा था…..जब उज्जवल भविष्य की चाह में छात्रों की राह में पेपरलीक और घोटालों की अंधी बाढ़ आ जाये तो कोई क्या करेगा. हर एग्जाम की मोटी फ़ीस और पेपरलीक की घटनाओं ने हमारी भावी पीढ़ी को आत्महत्या करने तक पर मजबूर कर दिया… कुंभकर्ण की नींद में सोई एनडीए सरकार को जगाने के लिए सोनम वांगचुग .सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम नेता उठ खड़े हुए तो कौनसा गुनाह कर दिया… सड़कें सुनसान थी संसद में NEET पर चर्चा नहीं थी सो माहौल गर्म होते ही साहब की नींद जाग गयी….हाथों हाथ सरकार नीट पर चर्चा के लिए राजी…. साथ ही दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ओर उसके बाद कॉंग्रेस नेता राहुल गाँधी के प्रदर्शन से साबित हो गया की 56इंच के सीने वाले की सरकार बौखला गई है..उसके पास कोई जवाब नहीं है..वो डरी हुई है।

ये ऐसी घटनायें है जिसने एक बार फिर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर सड़कें सुनसान हो जाएं. तो संसद आवारा हो जाएगी”

यह प्रसिद्ध कथन महान समाजवादी विचारक और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कहा था…..जब उज्जवल भविष्य की चाह में छात्रों की राह में पेपरलीक और घोटालों की अंधी बाढ़ आ जाये तो कोई क्या करेगा. हर एग्जाम की मोटी फ़ीस और पेपरलीक की घटनाओं ने हमारी भावी पीढ़ी को आत्महत्या करने तक पर मजबूर कर दिया… कुंभकर्ण की नींद में सोई एनडीए सरकार को जगाने के लिए सोनम वांगचुग .सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम नेता उठ खड़े हुए तो कौनसा गुनाह कर दिया… सड़कें सुनसान थी संसद में NEET पर चर्चा नहीं थी सो माहौल गर्म होते ही साहब की नींद जाग गयी….हाथों हाथ सरकार नीट पर चर्चा के लिए राजी…. साथ ही दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ओर उसके बाद कॉंग्रेस नेता राहुल गाँधी के प्रदर्शन से साबित हो गया की 56इंच के सीने वाले की सरकार बौखला गई है..उसके पास कोई जवाब नहीं है..वो डरी हुई है.. ये ऐसी घटनायें है जिसने एक बार फिर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है… लेकिन जब सरकार बातचीत की जगह डंडे का सहारा लेने लगें. तो ये लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक संकेत है..
दिल्ली में छात्रों पर लाठियां चलीं. तो उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं…युवाओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला..
ये कानून-व्यवस्था का मामला नहीं. बल्कि युवाओं के बढ़ते असंतोष का आईना है. सरकारें यदि समय रहते बातचीत करतीं. तो शायद हालात यहां तक नहीं पहुंचते..

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारें अब हर विरोध को बल प्रयोग से दबाना चाहती हैं? क्या युवाओं की आवाज़ सुनना सरकारों के लिए इतना मुश्किल हो गया है कि जवाब बातचीत से नहीं. बल्कि पुलिस की लाठियों से दिया जा रहा है?
किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की ताकत आलोचना सुनने में होती है. आलोचकों को चुप कराने में नहीं.
यदि छात्र अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं. तो यह केवल छात्रों की नहीं.शासन व्यवस्था की भी विफलता का संकेत है।

सरकारों को यह समझना होगा कि लाठियां आंदोलन को कुछ समय के लिए रोक सकती हैं। लेकिन असंतोष को खत्म नहीं कर सकतीं।

युवाओं के सवालों का जवाब डंडे से नहीं। बातचीत और समाधान से देना होगा। अन्यथा जनता यह पूछने का पूरा अधिकार रखती है कि क्या सरकारें जनभावनाओं को समझने और संभालने में नाकाम साबित हो रही हैं? जिस तरह से युवाओं पर लाठियां चलाई गई। उससे हर कोई दुःखी है। अधिकारी हो या आप जन लेकिन सरकारों का डर है कि बोल नहीं रहे हैं। केंद्र सरकार ने सारी हदे पार कर दी। खाकी पर भी दाग लग गया। लेकिन देश का युवा जाग गया।

उत्तराखंड से भी काफ़ी संख्या में युवाओं ने इस आंदोलन में भाग लिया। खैर कुछ भी हो मोदी जी आप का सीना भले ही आपकी जुबान में 56 इंच का हो। लेकिन आप मे दिल बिल्कुल भी नहीं है। शर्म बिल्कुल भी नहीं। ये अब साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button