उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक प्राधिकरण से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक प्राधिकरण से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था
अल्पसंख्यक बच्चे अब पड़ेंगे राष्ट्रवाद की शिक्षा
देहरादून।
उत्तराखंड में इस साल जुलाई माह से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म होने जा रहा है।
बीजेपी सरकार ने ट्रिपल तलाक कानून,समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने के बाद मदरसा बोर्ड खत्म करके एक और साहसिक प्रयोग देवभूमि उत्तराखंड में किया है।
उल्लेखनीय है कि पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने के लिए मदरसा बोर्ड को ही समाप्त करते हुए आगामी शिक्षा सत्र से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के छतरी के नीचे एकत्र कर दिया है। अभी तक जो मदरसे चल रहे थे या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाएं चल रही थी उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और उन्हें आगे से प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम ही पढ़ाना होगा और साथ ही उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी।
इन शिक्षण संस्थाओं को प्राधिकरण के छतरी के अधीन इसलिए पंजीकरण जरूरी किया गया है ताकि वे सरकार की आर्थिक सहायता ,वजीफा आदि ले सकेंगे। अब आगे से मदरसा नाम की संस्थाएं राज्य में नहीं चल पाएंगी।
क्यों लिया धामी सरकार ने निर्णय
धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड समाप्त करने का निर्णय इसलिए लिया था कि उत्तराखंड में सैकड़ों मदरसे बिना सरकार की अनुमति से चल रहे थे और यहां बाहरी राज्यों के मुस्लिम बच्चे लाकर पढ़ाए जा रहे थे।
हरिद्वार जिले में बहुत से मदरसे संज्ञान में आए जहां हिन्दू बच्चे भी इस्लाम की मजहबी शिक्षा लेते हुए मिले जिसका संज्ञान राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने लिया था और शासन के उच्च अधिकारियों का जवाबतलब किया था। धामी सरकार ने 227 अवैध मदरसे बंद कराते हुए उनकी तालाबंदी करवा दी थी।
इन अवैध मदरसों को कौन फंडिंग कर रहा था,इनके संचालकों का सत्यापन जब हुआ तब सरकार की भी नींद टूटी और उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले अपनी कैबिनेट में मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने का फैसला लिया फिर इसे विधानसभा में पारित करवा कर,अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के लिए नई राष्ट्रवादी शिक्षा व्यवस्था को लागूं कराने का फैसला लिया जिसे राज्यपाल ने भी स्वीकृति प्रदान की।
प्राधिकरण का गठन
उत्तराखंड की धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के 12 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है।जिसके अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को बनाया गया है, प्रोफेसर गांधी सिख समुदाय से है और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ है। सदस्यों में दो मुस्लिम प्रोफेसर है जोकि अल्मोड़ा में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में कार्यरत है।इनमें डॉ सैय्यद अली हमीद का नाम भी शामिल है साथ ही एक मुस्लिम युवक महिला प्रोफसर रोबिना अमन का नाम भी है।
इसी तरह से जैन समाज से डॉ राकेश जैन, ईसाई समुदाय से डॉ एल्बा, बौद्ध समुदाय से पेमा तेनजिन और सिख समुदाय से डॉ गुरमीत सिंह का नाम है। समाजसेवी राजेंद्र बिष्ट और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को भी स्थान मिला है,तीन अन्य पदेन सदस्य है जोकि अल्पसंख्यक और शिक्षा विभाग से है।
क्या कहते है विशेष सचिव डॉ धका%A