उत्तराखंड

अयोध्या में राष्ट्रभक्ति से गूंजा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, साहित्यकारों का भव्य सम्मान

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में राष्ट्रवादी काव्य की रसधार, साहित्यकारों का हुआ भव्य सम्मान
अयोध्या। भव्यकुंड के समीप स्थित होटल परमेश्वर पैलेस में आयोजित ‘दिव्योत्सव’ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों और कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का संदेश दिया।

कार्यक्रम का आयोजन दिव्योत्सव साहित्यिक मंच, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूज्यपाद डॉ. विजय भास्कर पाण्डेय ‘पवन जी महाराज’ द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. किरण सिंह, डॉ. मनोरमा सिंह, डॉ. मनोमेध शर्मा एवं डॉ. केचन गुप्ता को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुष्पमालाओं से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की संयोजिका सुधा सिंह ने सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य समाज को नई दिशा देने और राष्ट्रभावना को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने अपने साहित्यिक गुरु डॉ. मनोमेध शर्मा तथा शिक्षकीय गुरु डॉ. केचन गुप्ता के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।


कवि सम्मेलन में विष्णुकान्त मिश्र, प्रदीप सारंग, विजय लाल, हरियाणा गोयल सुनील शर्मा, पद्मभूषण कमलेश मोर्चे यदु, मनन तिवारी, डॉ. रमेश शर्मा, राजेश तिवारी ‘मख्खन’, सी.पी. वैद्यक, अमित श्रीवास्तव, ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, दिनेश कुमार सिन्हा, ललित कुमार शर्मा, सुधांशु गुप्ता, अविनाश भट्टकर, हरि प्रकाश गुप्ता ‘सरल’, के.पी. सिंह ‘विकल’, केसराम चौहान, डॉ. हिना कौसर गोरखपुरी, डॉ. राजकुमार आशीर्वाद, अजय मिश्र ‘अजय’, किरण भारद्वाज, वंदना शर्मा, साधना अग्रवाल, विभा त्रिपाठी, नीलम पाण्डेय, स्वाति गोयल, सोनिया नायक, अजय पाण्डेय, कल्पना रस्तोगी, ओमप्रकाश चतुर्वेदी, ममता सिंह परिहार, नित्यानंद सिंह, प्रभाकर, सुनीता मिश्रा, रमा सिंह, मेधा अग्रवाल, दुर्गा गुप्ता, अंजली कुमारी, ज्योति मौर्य, अनिल प्रज्वक्ता, मोहित अग्रवाल, नीरज चौधरिया, प्रभात पटेल, अक्षय मिश्रा, परसवीर सिंह, अनिका, प्रभात शुक्ला, मो. सिंह चौहान, डॉ. प्रतिभा श्रीवास्तव तथा यश सेनी साहू सहित अनेक रचनाकारों ने काव्यपाठ किया।

कवियों ने वीर रस, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, शिक्षा, चरित्र निर्माण, भारतीय संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। वीर रस की कविताओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया, वहीं हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने सभी को खूब गुदगुदाया।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण और राष्ट्र चेतना का सशक्त साधन है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, हिंदी भाषा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन भविष्य में भी हिंदी साहित्य और राष्ट्रभावना की अलख को निरंतर प्रज्वलित करते रहेंगे। समारोह का समापन राष्ट्रगान एवं सामूहिक छायाचित्र के साथ हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button