Home राजनीति सियासी दूरी का सबब न बने सीएम की “डिस्टेंसिंग”

सियासी दूरी का सबब न बने सीएम की “डिस्टेंसिंग”

त्वरित टिप्पणीः कांग्रेसियों के सीएम आवास से “बैरंग” लौटने का मामला

कई मौकों पर पांच से अधिक लोगों से मिले हैं सीएम

क्या कांग्रेस अब हटा पाएगी मित्र विपक्ष का तमगा

न्यूज वेट ब्यूरो

देहरादून। तीन साल से मित्र विपक्ष की भूमिका में दिख रही कांग्रेस को मुख्यमंत्री ने उसका असली चेहरा दिखा दिया है। कई मौकों पर चार से अधिक लोगों से मिल चुके सीएम ने कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल के आठ लोगों से मिलना डिस्टेंसिंग की वजह से गंवारा नहीं किया। अब कांग्रेस कह रही है कि अब सरकार के सहयोग पर पुनर्विचार किया जाएगा। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस खुद पर चिपके मित्र विपक्ष के तमगे से निजात पा सकेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भले ही जमीनी हकीकत का जायजा लेने फील्ड में न निकल रहें हों। पर सामाजिक दायित्व निभा ही रहे हैं। पिछले दिनों यूपी के सीएम योगी के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उस दौरान तो डिस्टेंसिंग और 20 के अधिक लोगों के शामिल न होने के आदेश की धज्जियां उड़ने की बातें सोशल मीडिया में वायरल हुईं। बाद में नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में भी दो स्थानों पर सीएम संवेदनाएं व्यक्त करने गए।

अब सवाल यह खड़ा हो रहा कि कांग्रेस के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने से सीएम ने इंकार क्यों किया। क्यों मामला इस बात अटक गया कि महज चार लोग ही सीएम से मिल सकते हैं। सोशल मीडिया में वो तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिनमें सीएम चार से अधिक लोगों से एक साथ ही मिलते दिख रहे हैं। बुधवार को सीएम आवास में कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और उपाध्यक्ष सूर्य़कांत धस्माना ने कहा कि वे लोग डिस्टेंसिंग नियम का पालन करेंगे। लेकिन मंजूरी नहीं मिली तो कांग्रेसी बैरंग ही लौट आए। अब कांग्रेस कह रही है कि सरकार का सहयोग करने पर फिर से विचार किया जाएगा। अहम बात यह भी है कि ये कांग्रेसी सीएम का वक्त मिलने के बाद ही गए थे।

यहां बता दें कि उत्तराखंड गठन के बाद से या तो कांग्रेस सत्ता में रही है या भाजपा। जो भी दल सत्ता से बाहर रहा, उस पर मित्र विपक्ष के आरोप लगते ही रहे। पिछले तीन सालों ने कांग्रेस भी इसी भूमिका में है। केवल विधानसभा सत्र में ही कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में दिखाई देती है। अब देखना होगा कि बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास में हुई इस घटना के बाद सियासी डिस्टेंसिंग अपनाती है या फिर महज जुबानी जमा-खर्च करती है।

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