उत्तराखंड

लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ, राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया उद्घाटन

लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ, राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया उद्घाटन

60 देशों के साहित्यकारों और भारत के विभिन्न राज्यों के विद्वानों की सहभागिता; साहित्य, संस्कृति और भारतीय भाषाओं के वैश्विक संवर्धन का संकल्प

थानों (देहरादून) 25 अक्टूबर। हिमालय की सुरम्य वादियों में स्थित लेखक गाँव में रविवार को ‘लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026’ (अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव) का भव्य शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन के कर-कमलों से हुआ। साहित्य, संस्कृति, कला और भारतीय भाषाओं को समर्पित इस महोत्सव में 60 देशों तथा भारत के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, कवियों, शिक्षाविदों, चिंतकों, कलाकारों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। उद्घाटन समारोह में साहित्य की सामाजिक भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना और विश्वबंधुत्व को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।

राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लेखक गाँव की परिकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वप्नों को साकार करने की दिशा में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का प्रयास सराहनीय है। उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ वीरता, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली परंपरा के लिए भी जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि जिस लेखनी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना जगाई, वही आज राष्ट्र के चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी रचनाओं से समाज में संवेदनशीलता जागृत करें, राष्ट्रीय कर्तव्यबोध को प्रबल बनाएँ और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ें। शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने साहित्यकारों की लेखनी से समाज में ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मकता का अमृत प्रवाहित होने की कामना की।

उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जब विश्व के अनेक हिस्से युद्ध और अशांति से प्रभावित हैं, तब हिमालय की गोद में स्थित लेखक गाँव शांति, संस्कृति और मानवीय सद्भाव का संदेश दे रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस श्रद्धा से लोग भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए उत्तराखंड आते हैं, उसी भाव से उन्हें लेखक गाँव में साहित्य, चिंतन और साधना के लिए भी आना चाहिए। उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी जैसी लोकभाषाओं को इस वैश्विक मंच पर उचित स्थान देने का आह्वान किया, ताकि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और भाषाई विरासत को व्यापक पहचान मिल सके।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने लेखक गाँव को साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत केंद्र बताते हुए कहा कि यह युवाओं के लिए सृजन और रचनात्मक संभावनाओं का महत्त्वपूर्ण मंच बन सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन विभिन्न देशों के साहित्यकारों और संस्कृतियों के बीच संवाद, सहयोग तथा मैत्री को प्रगाढ़ करेंगे।

रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि लेखक गाँव ज्ञान और सृजन का ऐसा केंद्र बनेगा, जिसकी ज्योति विश्व को आलोकित करेगी। वहीं, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सत्ताएँ आती-जाती रहेंगी, लेकिन राष्ट्र की आत्मा को सुरक्षित रखने के लिए ज्ञान और लेखकों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने लेखक गाँव की परिकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. निशंक ने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण पहल की है।

प्रसिद्ध प्रवासी कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने लेखक गाँव की तीन वर्षों की यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी साहित्यिक केंद्र की वास्तविक सफलता वहाँ होने वाले सृजन और पाठकों तक पहुँचने वाली पुस्तकों से निर्धारित होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लेखक गाँव ऐसा सृजनधाम बनेगा, जहाँ रची गई साहित्यिक कृतियाँ व्यापक पाठक समुदाय तक पहुँचेंगी और भारतीय साहित्य को नई पहचान देंगी।

महोत्सव के अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने राज्यपाल सहित सभी अतिथियों, संत-महात्माओं, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों और देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन के साथ संसद में बिताए समय का स्मरण करते हुए उन्होंने उनके सामाजिक सरोकारों, जनसेवा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का उल्लेख किया।

डॉ. निशंक ने कहा कि लेखक गाँव केवल एक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक सृजन और सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प है। हिमालय की यह पावन भूमि सदियों से ऋषियों, मनीषियों और साधकों की तपस्थली रही है।

लेखक गाँव इसी गौरवशाली परंपरा को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने का प्रयास है, जहाँ साहित्य, संस्कृति, कला और ज्ञान के विविध आयामों का संगम हो सके। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसके भविष्य का मार्गदर्शक भी है।

साहित्यकारों की लेखनी सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव भारतीय भाषाओं के संवर्धन, देश-विदेश के रचनाकारों के बीच संवाद तथा भारतीय साहित्य की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई प्रदान करेगा।

लेखक गाँव की निदेशिका विदुषी निशंक ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और कला के माध्यम से रचनात्मक संवाद को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महोत्सव विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच आत्मीयता बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को अपनी साहित्यिक विरासत से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का शुभारंभ साहित्य को सामाजिक चेतना, संस्कृति को राष्ट्रीय अस्मिता और ज्ञान को मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनाने के संकल्प के साथ हुआ। देश-विदेश से आए साहित्यकारों और विद्वानों की सहभागिता ने इस आयोजन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। महोत्सव के माध्यम से भारतीय भाषाओं, साहित्यिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने तथा विश्वबंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में सार्थक पहल की गई है।

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