उत्तराखंड

बीते वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 210 करोड़ का अधिक राजस्व किया हासिल

आयुक्त अनुराधा पाल ने विभागीय अफसरों औऱ कर्मियों को दी बधाई

उत्तराखंड आबकारी विभाग ने तोड़ा रिकॉर्ड, 4570 करोड़ से ज्यादा राजस्व

बीते वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 210 करोड़ का अधिक राजस्व किया हासिल

आयुक्त अनुराधा पाल ने विभागीय अफसरों औऱ कर्मियों को दी बधाई

वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति के पश्चात आबकारी नीति विषयक नियमावली के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश आबकारी राजस्व में विगत वर्ष 2024-25 की तुलना में रू0 210 करोड़ से अधिक की राजस्व वृद्धि दर्ज करते हुए रू0 4570.50 करोड़ का अधिकतम राजस्व प्राप्त किया गया है, जो कि अब तक का सबसे अधिक राजस्व लक्ष्य प्राप्त किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में समस्त 13 जनपदों में 698 फुटकर मदिरा दुकानों का सफल संचालन किया गया। किसी भी मदिरा अनुज्ञापी के विरुद्ध वसूली की कार्यवाही नहीं की गई और ना ही कोई अनुज्ञापी डिफाल्टर हुआ। विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी विभाग द्वारा पिछले राजस्व संग्रहण में वृद्धि हासिल की गई है।

यह भी उल्लेखनीय है कि जनपद देहरादून, उधमसिंहनगर, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग में शतप्रतिशत सेटलमेंट किया गया है। वहीं अन्य जनपदों में दिया गया राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई मदिरा दुकानों को जनपद अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी, आदि जनपदों में खोला गया है।

आबकारी विभाग उत्तराखण्ड जहां एक ओर राजस्व संग्रहण के लिए प्रतिबद्ध है, तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित मदिरा की उपलब्धता के साथ-साथ स्थानीय जन भावनाओं के दृष्टिगत जहां कहीं भी मदिरा दुकानों का स्वाभाविक विरोध दृष्टिगोचर होता है, उन स्थानों पर जिलाधिकारी महोदय से वार्ता कर जन भावनाओं के अनुकूल निर्णय लेते हुए मदिरा दुकानों के संचालन या बंद किये जाने पर निर्णय लिया जाएगा।

प्रदेश आबकारी विभाग ने आबकारी नीति के क्रियान्वयन के सफल प्रयास किए हैं। जिसमें राज्य में उद्योग की स्थापना से रोजगार के अवसर के साथ राज्य की आर्थिक प्रगति जिसमें विशेष रूप से विन्टनरी/वाईनरी की स्थापना के प्रोत्साहन हेतु राजस्व, लाईसेन्स फीस, शुल्क आदि में 15 वर्षों की छूट प्रदान की गई है, इन सब सहुलियत व राजस्व में छूट की वजह से राज्य में उत्पादन, वाईनरी निर्माण की इकाईयां स्थापित हो रही है, जिसमें जनपद बागेश्वर, चंपावत और जनपद पौड़ी के कोटद्वार एक-एक वाईनरी की स्थापना की हुई है। इसके अतिरिक्त जनपद हरिद्वार के लण्डौरा / मंगलोर में विदेशी मदिरा निर्माण की वृहद इकाई का लाईसेन्स दिया गया है, जिसमे उत्पादन कार्य प्रारम्भ हो गया है। इसी प्रकार जनपर हरिद्वार के भगवानपुर में ब्रुवरी से निर्यात स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है एवं जनपद उधमसिंहनगर में देशी, विदेशी मदिरा एवं बीयर उत्पादन इकाईयों की स्थापना की गई है तथा इन्हें आवश्यक लाइसेंस जारी किए गए है तथा कुछ इकाईयों के लाईसेन्स जारी किये जाने की प्रक्रिया में है।

सार्थक बॉटलिंग प्लांट हरिद्वार द्वारा 166000 मदिरा की पेटीयों को दिल्ली राज्य में निर्यात किया गया है। मैसर्स वी०वी०एस० (किमाया) हरिद्वार द्वारा 800000 पेटियां एवं मैडुसा द्वारा 339105 पेटियां बीयर का निर्यात किया गया है। मैसर्स रेडिाको खेतान लि०, ऊधमसिंहनगर से 311827 पेटियां, हिमालय वाईन 13000 पेटियां, गिरीश डिस्टलरी 10392, स्कुवास 6000 पेटियां एवं मैसर्स आईजीएल द्वारा 370000 पेटियां का निर्यात किया गया है।

विदेशी शराब पर एक्साइड ड्यूटी एवं अधिभार में मामूली वृद्धि के साथ 6% वैट का आरोपण किया गया है, जिससे विदेशी के मूल्य में मामूली वृद्धि होगी, और समुद्रपार आयातित ओवरसीज मदिरा के मूल्य में विगत वर्ष के भांति 12% वैट का आरोपण के साथ ओवरसीज मदिरा के मूल्य में मामूली वृद्धि होगी, तथा देशी मदिरा का मूल्य विगत वर्ष के बराबर रहेगा।

समग्र रूप से आबकारी नीति 2025-26 के प्रथम वर्ष का सफल क्रियान्वयन किया गया है तथा आगामी आबकारी नीति के दूसरे वर्ष 2026-27 को सफल बनाने हेतु शत्प्रतिशत व्यवस्थापन का प्रयास विभाग ने किया है, जिससे आगामी आबकारी राजस्व से लक्ष्य को प्राप्त करने तथा अधिकतम राजस्व संग्रहण करने का विभाग प्रयास करेगा।

 

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