उत्तराखंड

25 साल में महज 362 दिन ही चला उत्तराखंड विधानसभा का सत्र

25 साल में महज 362 दिन ही चला उत्तराखंड विधानसभा का सत्र

एक साल में कम से कम 60 दिन सदन चलने की है संवैधानिक परंपरा

सर्वाधिक खंडूड़ी सरकार में 105 दिन और सबसे कम मौजूद धामी सरकार में 45 दिन चला सदन

भराड़ीसैंण। उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा का आखिरी सत्र बुधवार को संपन्न हो गया। पांचों विधानसभाओं में कुल कार्यकाल की अवधि देखें तो दूसरी सरकार में सर्वाधिक 105 दिन सदन की कार्यवाही चली थी।

विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली के तहत एक वर्ष में कम से कम 60 दिन विधानसभा का सत्र चलना चाहिए। पुराने आंकड़े देखें तो तस्वीर साफ होती नजर आ रही है।

पहली सरकार में 2002 से 2007 के बीच प्रतिवर्ष सदन संचालन के दिनों का औसत 16.6 दिन का रहा। दूसरी सरकार में औसत प्रति वर्ष 21 दिन का रहा।

तीसरी सरकार में वर्ष 2012 से 2017 तक सदन की कार्यवाही का औसत प्रति वर्ष 14.4 दिन रहा। चौथी सरकार में वर्ष 2017 से 2022 के बीच सदन की कार्यवाही का औसत प्रति वर्ष 12.2 दिन रहा।

पांचवीं सरकार में वर्ष 2022 से 2026 तक सदन की कार्यवाही चली। 2022 में आठ दिन (मार्च में नई विधानसभा गठन, अध्यक्ष चुनाव के दिन, जून में बजट के चार दिन, नवंबर में अनुपूरक बजट दो दिन), 2023 में 10 दिन, 2024 में 10 दिन (यूसीसी पर विशेष सत्र तीन दिन, बजट सत्र चार दिन, अनुपूरक बजट तीन दिन), 2025 में 10 दिन और 2026 में सात दिन (बजट सत्र पांच दिन, अनुपूरक बजट दो दिन) सदन की कार्यवाही चली।

खबर साभार अमर उजाला

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