उत्तराखंड

बर्मिंघम में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण का ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम

बर्मिंघम में गूंजा पद्मश्री प्रीतम भरतवाण का जादू, हजारों प्रवासी उत्तराखंडियों की मौजूदगी में सजी लोकसंस्कृति की भव्य शाम

बर्मिंघम (यूनाइटेड किंगडम)। ब्रिटेन के बर्मिंघम में पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण की शानदार प्रस्तुति ने हजारों प्रवासी उत्तराखंडियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उत्तराखंड वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन और शिल्पा प्रोडक्शन के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में इंग्लैंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में उत्तराखंडी अपनी लोकसंस्कृति और लोकसंगीत के इस उत्सव का हिस्सा बनने पहुंचे।
प्रीतम भरतवाण ने अपने लोकप्रिय लोकगीतों, पारंपरिक जागरों और पंवाड़ों की सशक्त प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी मधुर आवाज और पहाड़ की मिट्टी से जुड़ी लोकधुनों ने प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जन्मभूमि, गांवों और सांस्कृतिक विरासत की याद दिला दी।

कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण तब आया, जब प्रीतम भरतवाण और उनके भाई सुरतम भरतवाण ने पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल-दमाऊ हाथों में लेकर गायन और वादन शुरू किया। ढोल-दमाऊ की गूंज और जागर की पारंपरिक लय पर दर्शक अपनी जगह से खड़े होकर तालियां बजाने लगे और झूम उठे। पूरे आयोजन में दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था।

इस अवसर पर अंजलि खरे, सुरतम भरतवाण और विवेक नौटियाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रीतम भरतवाण और उनकी टीम का आयोजकों की ओर से भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ और श्रोताओं के अपार उत्साह से आयोजक भी बेहद प्रसन्न नजर आए।

प्रीतम भरतवाण ने अपने संबोधन में प्रवासी उत्तराखंडियों से अपनी मातृभाषा, बोली, लोकसंगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और भाषा से जुड़े रहना हमारी पहचान और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

विदेश की धरती पर उत्तराखंड की लोकपरंपराओं के प्रति लोगों का यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ का लोकसंगीत भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। बर्मिंघम की यह संगीतमय संध्या उत्तराखंड की समृद्ध लोकविरासत, सांस्कृतिक एकता और अपनी मिट्टी के प्रति अटूट प्रेम का यादगार उदाहरण बन गई।

कार्यक्रम की शानदार सफलता पर पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने उत्तराखंड वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, शिल्पा प्रोडक्शन, आयोजकों, सहयोगियों और उपस्थित सभी श्रोताओं के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

प्रीतम भरतवाण की गायकी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की गूंज सात समंदर पार भी लोगों के दिलों को जोड़ने की अद्भुत शक्ति रखती है।

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