उत्तराखंड में तिहाई भाजपा विधायकों के टिकट पर लटकी तलवार

उत्तराखंड में तिहाई भाजपा विधायकों के टिकट पर लटकी तलवार
पार्टी के आंतरिक सर्वे में 32 विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में गहरी नाराजगी
हिमांशु मिश्रा
नई दिल्ली। उत्तराखंड के दो तिहाई विधायकों का अगले विधानसभा चुनाव में टिकट कट सकता है। पार्टी और संघ की ओर से राज्य में अपने हिस्से की सभी 47 सीटों पर कराए गए आंतरिक सर्वे में 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी की बात सामने आई है।
पार्टी नहीं चाहती कि विधायकों के खिलाफ गहरी नाराजगी उसकी जीत की हैट्रिक की संभावनाओं पर ग्रहण लगाए। ऐसे में नेतृत्व इन सीटों पर नया चेहरा पेश कर सत्ता विरोधी लहर की धार को कुंद करना चाहता है।
सरकार नहीं, विधायकों के खिलाफ गुस्सा
रिपोर्ट में सरकार के खिलाफ कम, विधायकों के खिलाफ नाराजगी ज्यादा है। लोग मानते हैं कि भाजपा के दस साल के शासन में विकास के कई कार्य हुए हैं। हालांकि इस दौरान स्थानीय बोध का स्वर मजबूत हुआ है। आंतरिक सर्वे के तहत, कुछ क्षेत्रों पर प्रशासनिक हिलाहवाली, युवाओं में सामान्य नाराजगी की भी बात सामने आई है, जिसे जल्द से जल्द दुरुस्त करने की पहल की जाएगी।
संघ सूत्रों के मुताबिक बीते दो महीने में राज्य की सभी 70 सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, महत्वपूर्ण हस्तियों के अलावा सामान्य लोगों से अलग-अलग माध्यमों से संपर्क के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।
धामी के लिए सुरक्षित सीट पर मंथन
नेतृत्व सीएम पुष्कर सिंह धामी के लिए नई और सुरक्षित सीट की व्यवस्था करने पर भी मंथन कर रहा है। दरअसल नेतृत्व चाहता है कि उनके लिए ऐसी सीट तलाशी जाए, जिससे वह चुनाव के दौरान पूरे राज्य में तनावमुक्त होकर चुनाव प्रचार कर सकें। गौरतलब है कि बीते चुनाव में खटीमा सीट से हारने के बाद धामी ने उपचुनाव में चंपावत सीट से जीत दर्ज की थी।
कमजोर विपक्ष की धारणा से सतर्क
सूत्र ने बताया कि राज्य में विपक्ष के मजबूत या कमजोर होने का परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ता, मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर की नाराजगी का होता है। राज्य में दिवंगत भुवन चंद खंडूरी के सीएम रहते कांग्रेस बेहद कमजोर थी, हालांकि तब भी विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों की नाराजगी के कारण भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी।
रिपोर्ट में बीते चुनाव में हारी हुई 23 सीटों में से 10 सीटों पर स्थिति बेहतर होने की संभावना जताई गई है।