उत्तराखण्ड बना सुरक्षा मॉडल: राफ्टिंग गाइड्स के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का फर्स्ट-एड प्रशिक्षण शुरू

उत्तराखण्ड बना सुरक्षा मॉडल: राफ्टिंग गाइड्स के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का फर्स्ट-एड प्रशिक्षण शुरू
ऋषिकेश। 10/1/2026
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मार्गदर्शन तथा पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ज्याल के नेतृत्व में आज प्रदेश में साहसिक पर्यटन सुरक्षा को नए आयाम देने वाली ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई।
उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद द्वारा Hanifl Centre के माध्यम से (In collaboration with, Aerie Backcountry Medicine (ABM) USA Montana) 10 जनवरी 2025 को ऋषिकेश में WFA (वाइल्डरनेस फर्स्ट एड) तथा CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम आरम्भ किया गया।

यह पहली बार है जब राज्य स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर रिवर राफ्टिंग गाइड्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित आपातकालीन चिकित्सीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
इस प्रथम बैच में कुल 50 प्रशिक्षु रिवर गाइड्स प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जबकि चरणबद्ध रूप से कुल 700 गाइड्स को इस वाइल्डरनेस फर्स्ट एड कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण तीन दिवसीय है जिसमें Hanifl Centre द्वारा तीन प्रमाणित प्रशिक्षकों को तैनात किया गया है।
कोर्स के दौरान वास्तविक आपात स्थितियों का अभ्यास, नदी दुर्घटना प्रबंधन क्षमता तथा कठिन परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार के कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उत्तराखण्ड हर वर्ष 5 लाख से अधिक रोमांच प्रेमियों को राफ्टिंग, कायाकिंग तथा अन्य साहसिक गतिविधियों के लिए आकर्षित करता है। ऐसे में यह प्रशिक्षण न केवल नदी गाइड्स की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ाएगा बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दुर्घटनाओं में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने तथा उत्तराखण्ड को जिम्मेदार साहसिक पर्यटन के अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी साझा करते हुए सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ज्याल द्वारा अवगत कराया गया कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक रिवर गाइड को WFA (वाइल्डरनेस फर्स्ट एड) में प्रशिक्षित किया जाए जिससे प्रदेश में सुरक्षित, सशक्त और पेशेवर एडवेंचर पर्यटन संरचना विकसित हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह पहल केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनेगी।
WFA (वाइल्डरनेस फर्स्ट-एड) तथा CPR जैसे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त गाइड्स न केवल राफ्टिंग गतिविधियों में अवसर पाएंगे, बल्कि साहसिक पर्वतारोहण, ट्रैकिंग, कैम्पिंग, आउटडोर शिक्षा, और निजी एडवेंचर कंपनियों में प्रशिक्षक जैसी नई पेशेवर संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे।
गत वर्षों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने वाले वातावरण और मजबूत पर्यटन अवसंरचना के चलते उत्तराखण्ड में साहसिक पर्यटन तेजी से वृद्धि के दौर में है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कौशल आधारित कार्यबल तैयार होगा जो भविष्य में पर्यटन अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा।
यह पहल प्रदेश में स्किल ड्रिवन टूरिज्म इकोनॉमी की नींव रखकर युवाओं को नयी दिशा और अवसर प्रदान करेगी तथा अंततः उत्तराखण्ड को रोमांच पर्यटन के क्षेत्र में देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।