अंधेरों में जलता दीप: दिव्यांग सागर शर्मा की प्रेरणादायक गाथा

उत्तराखंड।
हौसला है वो दीप, जो अंधेरों में जलता है,
हर गिरते कदम पर फिर से उठने का सवेरा देता है।
हौसला है वो पहाड़, जो आँधियों को भी चीरता,
जज़्बों की आग में जलकर, सपनों को नई ताज़गी देता।l
हौसले की इस उडान के विहग है जनपद हाथरस के साधारण निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखने वाले 30 वर्षीय दिव्यांग सागर शर्मा, जिन्होंने देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने के अपने जज्बे के बल पर दिव्यांगता का अभिशाप झूठा सिद्ध कर दिया. दिव्यांगों के लिए सागर हौसले की वो मिशाल है जिनकी चर्चा इन दिनों जनपद के हर दिलों जुबां पर सुर्खिया बटोर रही है. आइये जानते है कौन है सागर शर्मा और क्या है उनकी संघर्ष गाथा….
दिव्यांग सागर शर्मा का जन्म 16 मई 1995 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सादाबाद तहसील के रमचेला गाँव में हुआ। पिता सतीश चंद शर्मा हाथरस डिपो में रोडवेज़ के ड्राइवर थे और 2020 में सेवानिवृत्त हो गये। बचपन में ही सागर को पौने दो साल की उम्र में माइंड फीवर (ज्वर‑संक्रमण) हुआ, जिससे वह कई महीनों तक बिस्तर पर ही रहे और उनके दोनों पैर खराब हो गये।
इस बीमारी ने न केवल उनका स्वास्थ्य, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव डाल दिया; पिता की सीमित आय और माँ की घरेलू जिम्मेदारियों के बीच सागर की देखभाल एक चुनौती बन गई। इन कठिनाइयों के बावजूद सागर ने हौसला नही छोड़ा और हाथरस के स्थानीय स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की।
कठिन परिश्रम से वह कक्षा में एक होशियार विद्यार्थी के रूप में पहचानें गये। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद सागर ने जनपद के ही प्रतिष्ठित फूल चन्द बागला कालेज से राजनीति शास्त्र में पोस्ट‑ग्रेजुएशन किया, इस दौरान सामाजिक न्याय और दिव्यांगों अधिकारों के लिए वे हमेशा मुखर रहे।
उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए स्थानीय NGOs के साथ काम करना शुरू किया, दिव्यांग बच्चों के लिए शैक्षिक कार्यशालाएँ आयोजित कीं और सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने का प्रयास किया। सामाजिक सक्रियता और दृढ़ निश्चय ने सागर का ध्यान उत्तर प्रदेश दिव्यांग कल्याण बोर्ड की ओर आकर्षित किया। वे समझ गए थे कि दिव्यांगों के सम्पूर्ण समाधान और विकास के लिए बोर्ड ही सही मंच है।
उन्होंने बोर्ड के सामने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बेहतर पुनर्वास सेवाएँ, रोजगार के अवसर और सुलभ बुनियादी ढाँचा सुनिश्चित करने के प्रस्ताव रखे। उनके निरंतर प्रयासों, सामाजिक कार्यों और शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए, सागर को हाल ही में *उत्तर प्रदेश दिव्यांग कल्याण बोर्ड का सदस्य* नियुक्त किया गया है।
आज सागर शर्मा न केवल हाथरस बल्कि प्रदेश व देश के दिव्यांगों के लिए प्रेरणा स्रोत होने के साथ ही उनके अधिकारों के लिए एक मजबूत आवाज़ बन चुके हैं। उनका सफ़र यह दिखाता है कि कठिनाइयों को पार कर, दृढ़ संकल्प और सामाजिक सेवा के माध्यम से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।