उत्तराखंड

गेस्ट टीचरों का मानदेय बढ़ाने को लेकर मोर्चा लड़ेगा लड़ाई

गेस्ट टीचरों का मानदेय बढ़ाने को लेकर मोर्चा लड़ेगा लड़ाई

ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश का भी नहीं मिलता वेतन।

जीपीएफ व ईएसआई का दूर-दूर तक आता पता नहीं।

विभागीय मंत्री का इनकी पीड़ा से कोई सरोकार नहीं। मोर्चा प्रकरण को रखेगा सरकार के समक्ष।

विकासनगर- जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि प्रदेश भर के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत लगभग 5000 अतिथि शिक्षकों का भविष्य शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के नकरापन की वजह से अंधकारमय हो रखा है, लेकिन इन्होंने कभी गंभीरता से इन टीचर्स के भविष्य के बारे में नहीं सोचा। नेगी ने कहा कि इन अतिथि शिक्षकों को ₹25000 मानदेय दिया जा रहा है, जोकि नाकाफी है एवं इसके साथ-साथ इन अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाशों का वेतन (मानदेय) भी नहीं मिलता।

मूलभूत सुविधाओं के नाम पर इन कार्मिकों को न तो ईपीएफ की सुविधा मिलती है और न ही ईएसआई की| विभागीय मंत्री द्वारा रस्म अदायगी हेतु शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन आज तक अमल नहीं हो पाया | नेगी ने कहा कि 25000 रुपए में ये अतिथि शिक्षक अपने घरों से 100-200 किलोमीटर दूर अति दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता।

मोर्चा इन अतिथि शिक्षकों का मानदेय कम से कम ₹40000 करने व अन्य सुविधाएं दिलाने को लेकर लड़ाई लड़ेगा एवं मामले को सरकार के समक्ष भी रखेगा | पत्रकार वार्ता में- दिलबाग सिंह व प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद थे|

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