राहुल गांधी ने इनवेस्टर समिट पर खड़े किए सवाल तो सचिव विनय पांडे ने दिया जवाब

राहुल गांधी ने इनवेस्टर समिट पर खड़े किए सवाल तो सचिव विनय पांडे ने दिया जवाब
बोले, राज्य में 24 हजार करोड़ निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी
आटा चक्की, मोबाइल दुकान व अन्य छोटे व्यवसाय पर सवाल उचित नहीं
देहरादून। केंद्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने डिजिटल मीडिया न्यूज लांड्री के खुलासे को आधार बनाते हुए उत्तराखंड की इनवेस्टर समिट पर तमाम सवाल खड़े किए हैं। अब सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे ने एक वीडियो जारी करके इसे भ्रामक बताया है। पांडे ने समिट की पूरी तसवीर साफ की है।
उद्योग सचिव विनय शंकर पांडे ने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन से 1.01 लाख करोड़ के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। 24 हजार करोड़ निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी है। इसके लिए जल्द ही निवेश ग्राउंडिंग समारोह आयोजित किया जाएगा।
सचिव ने कहा, सोशल मीडिया पर निवेशक सम्मेलन को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। राज्य में निवेश से संबंधित सभी आंकड़े सार्वजनिक हैं और प्रत्येक परियोजना का विवरण संबंधित सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध है। सरकार ने निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश के विजन के अनुरूप राज्य की औद्योगिक नीतियां तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है।
बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन में 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू हुआ था। निवेशकों की सहायता के लिए सरकार ने निवेश मित्र नियुक्त किए हैं।
आटा चक्की, मोबाइल दुकान या अन्य छोटे व्यवसाय को निवेश की श्रेणी में शामिल करने पर सवाल उठाना उचित नहीं है। यदि कोई स्थानीय व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से 10 हजार रुपये का निवेश कर छोटा व्यवसाय शुरू करता है और उससे दो लोगों को रोजगार मिलता है।
अब तक 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र वन से आच्छादित है। बड़े उद्योगों की स्थापना देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर तथा नैनीताल के कुछ हिस्सों में अधिक है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य की औद्योगिक नीतियां तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है।