हिमालयी सरोकारों की आवाज बनेगी ‘हिमालय संवाद’, पत्रिका का हुआ लोकार्पण

हिमालयी सरोकारों को समर्पित हिन्दी मासिक पत्रिका “हिमालय संवाद” का लोकार्पण सम्पन्न
देहरादून, 02 अक्टूबर। हिमालयी समाज, पर्यावरण, लोकजीवन, ग्रामीण पर्यटन, संस्कृति तथा विकास संबंधी विषयों पर केंद्रित हिन्दी मासिक पत्रिका “हिमालय संवाद” का लोकार्पण आज देहरादून स्थित ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल के ऑडिटोरियम में आयोजित एक गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों, शोधकर्ताओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने हिमालय के बढ़ते महत्व और उसके समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, संस्कृति, जल स्रोतों और पर्यावरणीय संतुलन का आधार है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति, अनियोजित विकास, पलायन, जैव विविधता के क्षरण और स्थानीय संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों के सामने गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इन परिस्थितियों में हिमालय से जुड़े मुद्दों पर निरंतर, तथ्यपरक और जनोन्मुख संवाद समय की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने कहा कि आज विकास, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं, मीडिया और आम नागरिकों की साझा भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “हिमालय संवाद” इन विषयों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाने तथा विभिन्न पक्षों के बीच संवाद का सेतु बनने का कार्य करेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पत्रिका की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऐसी पत्रिकाओं की आवश्यकता है जो तात्कालिक घटनाओं से आगे बढ़कर दीर्घकालिक सामाजिक, पर्यावरणीय और विकास संबंधी प्रश्नों को गंभीरता से उठाएँ। उन्होंने कहा कि हिमालय से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता, जबकि इनके प्रभाव दूरगामी होते हैं। ऐसे में “हिमालय संवाद” जैसी पहल जनजागरण और नीति-स्तर पर सकारात्मक हस्तक्षेप का माध्यम बन सकती है।
हिमालय संवाद के प्रधान संपादक मुकेश प्रसाद बहुगुणा ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की समस्याओं, संभावनाओं और बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को व्यापक समाज के सामने लाना है। उन्होंने कहा कि यह पत्रिका किसी एक विचारधारा या दृष्टिकोण तक सीमित न होकर संवाद, विमर्श और रचनात्मक विचारों के लिए खुला मंच बनने का प्रयास करेगी।
समारोह में सूचना महानिदेश बंशीधर तिवारी, पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, डा० एस०पी०सिंह, डा० रवि चोपड़ा, डा० एस०पी० सेमवाल, डा० राकेश जुगराण, अतुल शर्मा, डा० रंजना शर्मा, गीता गैरोला, कुसुम रावत, तनुजा जोशी, अनुपम त्रिवेदी, डॉ प्रेम बहुखन्डी, इंद्रेश मैखुरी, अतुल सती, राहुल कोठियाल, मनमीत रावत, गजेद्र रावत, अतुल बरतरिया, गुणानंद जखमोला, अमित ओबेरॉय, त्रिलोचन भट्ट, जयदीप सकलानी, डा० राकेश भट्ट, विजय भट्ट, एडवोकेट चंद्रकला, उमा भट्ट, आलोक प्रभाकर, अर्चना बहुगुणा, कल्पना बहुगुणा, अरविंद शेखर, महावीर बिष्ट, राम सिंह चौहान आदि उपस्थित थे । कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने उपस्थित सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
