उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता: किन कारणों से बना भरोसे का आधार?

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता: किन कारणों से बना भरोसे का आधार?

पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में उभरी है, जिनकी राजनीति में विकास, सांस्कृतिक मुद्दे, प्रशासनिक फैसले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनीतिक तालमेल प्रमुख तत्व रहे हैं। उनकी लोकप्रियता को समझने के लिए केवल राजनीतिक नारों के बजाय उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रमुख फैसलों और उनके प्रभाव को देखना जरूरी है।
1. समान नागरिक संहिता से राष्ट्रीय पहचान
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की पहल धामी सरकार की सबसे चर्चित पहलों में रही। इससे उत्तराखंड को देश में इस विषय पर कानून लागू करने वाला पहला राज्य बनने की पहचान मिली। समर्थकों के लिए यह सामाजिक सुधार और समानता का मुद्दा है, जबकि आलोचकों ने इसके कुछ प्रावधानों और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक रूप से इस फैसले ने धामी को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दी।
2. नकल विरोधी कानून और भर्ती परीक्षाओं पर जोर
सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक की शिकायतों के बीच सरकार ने कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया। भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं में पैदा हुए असंतोष के बाद पारदर्शिता और सख्ती का संदेश देने की कोशिश हुई। युवाओं के बीच इस मुद्दे का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि सरकारी रोजगार पहाड़ी राज्य में रोजगार के प्रमुख विकल्पों में से एक है।
3. युवाओं को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त सरकारी रोजगार का संदेश
उत्तराखंड में सरकारी नौकरी युवाओं के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद धामी सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और नकल माफिया पर कड़ी कार्रवाई को प्रमुख मुद्दा बनाया। नकल विरोधी कानून और भर्ती प्रक्रिया में सख्ती के जरिए सरकार ने युवाओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकारी रोजगार में भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को कम किया जाएगा तथा योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा।
यह पहल धामी की राजनीतिक छवि में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड के हजारों युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता का मुद्दा सीधे युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। “मेहनत करने वाले युवा को बिना सिफारिश और बिना भ्रष्टाचार के नौकरी मिले”—यह संदेश सरकार की लोकप्रियता के महत्वपूर्ण आधारों में शामिल किया जा सकता है।
3. सख्त कानूनों की छवि
धामी सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून, लैंड जिहाद/अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट राजनीतिक रुख अपनाया। इन कदमों के समर्थक इन्हें सांस्कृतिक पहचान और कानून-व्यवस्था से जोड़ते हैं, जबकि विपक्ष और कुछ नागरिक समूहों ने इनके क्रियान्वयन तथा सामाजिक प्रभाव पर अलग-अलग चिंताएं जताई हैं।
4. चारधाम और धार्मिक पर्यटन पर फोकस
चारधाम यात्रा, मंदिरों के आसपास अवस्थापना विकास, ऑल-वेदर रोड, हवाई संपर्क और धार्मिक पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्टों ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुख बनाया है। केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसे बड़े प्रोजेक्टों में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय ने भी धामी सरकार को राजनीतिक लाभ दिया है।
5. पहाड़ और मैदान के बीच संतुलन की कोशिश
उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा यह सवाल रहा है कि विकास का लाभ पहाड़ी क्षेत्रों तक कितना पहुंचता है। धामी सरकार ने होमस्टे, महिला स्वयं सहायता समूह, स्थानीय उत्पाद, मिलेट्स, स्वरोजगार और ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया है। इससे पहाड़ की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
6. महिला मतदाताओं पर विशेष ध्यान
लखपति दीदी, महिला स्वयं सहायता समूह, मुख्यमंत्री स्वरोजगार और ग्रामीण आजीविका जैसी योजनाओं ने महिला केंद्रित विकास को राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी और स्वयं सहायता समूहों के विस्तार को सरकार अपने प्रमुख उपलब्धि क्षेत्रों में गिनाती है।
7. प्रधानमंत्री मोदी के साथ मजबूत राजनीतिक तालमेल
धामी की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र सरकार के साथ उनका समन्वय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तराखंड में लगातार यात्राओं और केंद्र की बड़ी परियोजनाओं—सड़क, रेल, रोपवे, पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास—को राज्य सरकार अपनी उपलब्धियों के साथ जोड़ती रही है। इससे धामी की छवि ‘डबल इंजन सरकार’ के राज्य स्तरीय चेहरे के रूप में मजबूत हुई है।
8. युवा मुख्यमंत्री की निरंतरता
धामी ने अपेक्षाकृत कम उम्र में मुख्यमंत्री पद संभाला और बाद में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी और धामी के नेतृत्व में सरकार बनने से उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई। हालांकि स्वयं धामी अपनी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे और बाद में चंपावत उपचुनाव जीते—यह तथ्य उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
9. प्रशासनिक फैसलों को राजनीतिक संदेश में बदलना
धामी सरकार की एक खास विशेषता यह रही है कि कई प्रशासनिक फैसलों को व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया—चाहे वह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो, भर्ती परीक्षाओं में सख्ती हो, धार्मिक स्थलों का विकास हो या UCC। इससे मुख्यमंत्री की एक निर्णय लेने वाले नेता की सार्वजनिक छवि बनाने में मदद मिली है।