देहरादून के 20 विद्यालयों के 1,000 से अधिक विद्यार्थियों ने टेक्सटाइल कलेक्शन एवं रीसाइक्लिंग अभियान में लिया भाग

देहरादून।
बढ़ती टेक्सटाइल (कपड़ा) अपशिष्ट की समस्या को देखते हुए सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन ने एन्को सोर्सिंग एवं बीटीआर ग्लोबल के ब्रांड वापसी के सहयोग से “टेक्सटाइल कलेक्शन एवं रीसाइक्लिंग अभियान” के प्रथम चरण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

यह अभियान जनवरी–फरवरी 2026 के दौरान देहरादून के 20 विद्यालयों में आयोजित किया गया, जिसमें 1,000 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता, जिम्मेदार उपभोग की आदतें तथा रीसाइक्लिंग के प्रति समझ विकसित करना था।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को बताया गया कि पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें दुबारा इस्तेमाल, रिपेयर या रीसाइकिल किया जा सकता है। साथ ही घर और विद्यालय स्तर पर कचरे के सेग्रीगेशन के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।

प्रत्येक विद्यालय में लगभग 50–60 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। जागरूकता सत्रों में सरल भाषा में कपड़ों के सम्पूर्ण जीवन चक्र पर उत्पादन, उपयोग और निस्तारण की जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि अत्यधिक कपड़े खरीदना और उन्हें शीघ्र इस्तेमाल न करना या डिस्कार्ड कर देना पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
अभियान के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों से पुराने वस्त्र एकत्रित किए गए। विद्यार्थियों ने कपड़ों की छंटाई और वर्गीकरण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ और जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 7,800 किलोटन टेक्सटाइल कचरा उत्पन्न होता है। यदि इसका समुचित प्रबंधन न किया जाए तो यह कचरा लैंडफिल, नालियों और नदियों में पहुंचकर पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता है।

एसडीसी फाउंडेशन से दिनेश चंद्र ने कहा कि टेक्सटाइल कचरे की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि विद्यार्थियों में प्रारंभिक अवस्था से ही जिम्मेदार आदतें विकसित की जाएं तो दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
प्यारे लाल ने कहा कि यह अभियान केवल कपड़े एकत्र करने तक सीमित नहीं था, बल्कि सोच में परिवर्तन लाने का एक प्रयास था। वहीं एसडीसी के परवीन उप्रेती ने सभी सहभागी विद्यालयों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर जारी रखने की बात कही।
अभियान का दूसरा चरण मार्च के अंतिम सप्ताह से अप्रैल तक संचालित किया जाएगा। इस चरण में उपयोग किए गए वस्त्रों का संग्रह जारी रहेगा तथा विद्यार्थियों को छंटाई, लेबलिंग और वर्गीकरण की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही रीसाइक्लिंग से पहले बटन, ज़िपर तथा अन्य धातु या प्लास्टिक घटकों को हटाने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक टेक्सटाइल को रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में लाना और समुदाय में जिम्मेदार उपभोग की संस्कृति को बढ़ावा देना है।