उत्तराखंड

मुजफ्फरपुर कोर्ट में उत्तराखंड के मंत्री पति पर परिवाद,बिहारी महिलाओं के अपमान का है मामला

मुजफ्फरपुर कोर्ट में उत्तराखंड के मंत्री पति पर परिवाद,बिहारी महिलाओं के अपमान का है मामला

मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी हुई है निर्धारित

मुजफ्फरपुर- उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी द्वारा बिहार की बेटियों पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस विवादित बयान के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर की अदालत में एक परिवाद (शिकायत) दर्ज कराया गया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

अदालती कार्यवाही और आरोप

मुजफ्फरपुर के चर्चित अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने एडीजे प्रथम (ADJ-1) की अदालत में यह मामला दर्ज कराया है। परिवाद में गिरधारी लाल साहू को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। अधिवक्ता ओझा ने अभियुक्त पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न गंभीर धाराओं— 192, 298, 352, 351, 328 (संभवतः 828 त्रुटिवश उल्लिखित), 52, 95, 86, 74 और 75 के तहत आरोप लगाए हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 12 जनवरी 2026 निर्धारित की है।

विवाद की जड़: शर्मनाक बयान
शिकायत के अनुसार, यह मामला मुजफ्फरपुर के काँटी थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव से संबंधित है, जहाँ 2 और 3 जनवरी 2026 को इस घटना का प्रभाव देखा गया। आरोप है कि गिरधारी लाल साहू ने इंटरनेट मीडिया पर जानबूझकर एक बेहद आपत्तिजनक बयान प्रसारित किया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “बिहार में 20-25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं।”

परिवादी का तर्क है कि यह बयान न केवल बिहार की बेटियों का अपमान है, बल्कि समस्त स्त्री समाज की गरिमा और लज्जा को भंग करने वाला है। इस टिप्पणी से राज्य की छवि धूमिल हुई है और लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।

राजनीतिक और सामाजिक उबाल

यह मामला अब बिहार और उत्तराखंड के बीच एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। बिहार राज्य महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस टिप्पणी को बेहद संवेदनशील और महिला विरोधी बताते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पर भी “बिहार की बेटी” के सम्मान में अभियान छिड़ गया है, जहाँ लोग मंत्री पति की गिरफ्तारी और सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।

अगला कदम

12 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो अभियुक्त की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल, मुजफ्फरपुर कोर्ट में दर्ज इस मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है, जहाँ मंत्री रेखा आर्य को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

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